Success Story ! परीक्षा रद्द हुई तो टूटने के बजाय फिर जुटे राजवीर, NEET-2026 में 594 अंक लाकर लिखा सफलता का नया अध्याय
रतलाम के राजवीर सिंह सोलंकी ने NEET-2026 में 594 अंक हासिल किए। पहली परीक्षा रद्द होने के बाद दोबारा मेहनत कर उन्होंने डॉक्टर बनने के अपने लक्ष्य की ओर मजबूत कदम बढ़ाया।
पहली परीक्षा में 680+ अंक की उम्मीद थी, परीक्षा रद्द होने के झटके के बाद दोबारा शुरू की तैयारी; अब परिवार के पहले डॉक्टर बनने की राह पर राजवीर सिंह सोलंकी
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । सफलता की असली परीक्षा अक्सर तब होती है, जब परिस्थितियां हमारे पक्ष में नहीं होतीं। रतलाम के विद्यार्थी राजवीर सिंह सोलंकी की NEET-2026 की सफलता इसी जज्बे की मिसाल है। पहली परीक्षा रद्द होने के बाद महीनों की मेहनत दोबारा दांव पर लगी, लेकिन राजवीर ने निराशा को खुद पर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने फिर से तैयारी शुरू की और Re-NEET में 594 अंक हासिल कर डॉक्टर बनने के अपने लक्ष्य की ओर मजबूत कदम बढ़ाया।
राजवीर की सफलता इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने यह उपलब्धि ऐसे समय में हासिल की, जब उन्हें दोबारा उसी मानसिक दबाव और तैयारी से गुजरना पड़ा, जिससे वे पहले ही निकल चुके थे। राजवीर की कहानी उन विद्यार्थियों के लिए खास संदेश देती है, जो किसी असफलता, अप्रत्याशित परिस्थिति या परीक्षा में मिले झटके के बाद खुद को हारा हुआ मान लेते हैं।
680 से ज्यादा अंक की उम्मीद, फिर परीक्षा रद्द होने का झटका
राजवीर बताते हैं कि 3 मई को हुई पहली NEET परीक्षा के बाद उन्हें 680 से अधिक अंक मिलने की उम्मीद थी। परीक्षा के बाद वे अपने परिणाम को लेकर आश्वस्त थे, लेकिन परीक्षा रद्द होने की खबर ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया।
एक पल के लिए ऐसा लगा कि महीनों की मेहनत और तैयारी व्यर्थ चली गई। परीक्षा दोबारा होने का मतलब था- फिर वही पढ़ाई, वही तनाव और उसी लक्ष्य के लिए खुद को मानसिक रूप से तैयार करना। लेकिन राजवीर ने परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय खुद को संभाला और दोबारा तैयारी में जुट गए।
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निराशा को बनाया ताकत, दोबारा शुरू की तैयारी
परीक्षा रद्द होने के बाद राजवीर ने अपनी रणनीति पर दोबारा काम किया। उन्होंने कमजोर विषयों पर ध्यान दिया, नियमित अभ्यास जारी रखा और लक्ष्य से अपना ध्यान नहीं हटने दिया।
इसका परिणाम Re-NEET में सामने आया, जहां उन्होंने 594 अंक हासिल किए। यह स्कोर उनके लिए सिर्फ एक परीक्षा का परिणाम नहीं, बल्कि उस मानसिक संघर्ष पर जीत भी है, जो परीक्षा रद्द होने के बाद उनके सामने खड़ा हुआ था।
राजवीर अब अपने परिवार के पहले डॉक्टर बनने की राह पर हैं। उनके पिता पत्रकार जितेंद्र सिंह सोलंकी सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि से आते हैं और उनका सपना था कि बेटा डॉक्टर बने। राजवीर ने पिता के इस सपने को अपना लक्ष्य बनाया और लगातार मेहनत करते हुए उसे पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाया।
माता-पिता और शिक्षकों को दिया सफलता का श्रेय
राजवीर ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के साथ अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. राकेश कुमावत और पूरी फैकल्टी टीम को दिया। उनका कहना है कि परिवार के भरोसे और शिक्षकों के मार्गदर्शन ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
राजवीर की सफलता पर अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट की ओर से उनका और उनके परिवार का पुष्पमाला पहनाकर एवं मिठाई खिलाकर सम्मान किया गया। संस्थान ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
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राजवीर का संदेश—गिरकर दोबारा उठना ही असली जीत
राजवीर कहते हैं-
“जीवन में परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत निरंतर हो और सही मार्गदर्शन मिले, तो सफलता निश्चित होकर रहती है। असली विजेता वही होता है जो गिरकर भी दोबारा उठ खड़ा होता है।”
NEET की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए राजवीर की कहानी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि किसी एक परीक्षा का परिणाम आपकी पूरी मेहनत को परिभाषित नहीं करता। असली फर्क उस समय पड़ता है, जब मुश्किल आने के बाद आप तय करते हैं कि रुकना है या फिर से शुरुआत करनी है।
राजवीर ने दोबारा शुरुआत को चुना—और 594 अंकों के साथ अपने डॉक्टर बनने के सपने को आगे बढ़ाने का रास्ता बना लिया।
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