एक और Innovation ! सान्दीपनि विनोबा स्कूल के शिक्षक बने विद्यार्थी; सीखने, सिखाने और स्कूल संस्कृति को गढ़ने का अनूठा प्रयोग

रतलाम के सान्दीपनि विनोबा विद्यालय में नए शैक्षणिक सत्र से पहले 29 शिक्षकों का विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया। मॉर्निंग मीटिंग, स्टेम लर्निंग, रोबोटिक्स, एफएलएन और सकारात्मक स्कूल संस्कृति पर हुआ फोकस।

एक और Innovation ! सान्दीपनि विनोबा स्कूल के शिक्षक बने विद्यार्थी; सीखने, सिखाने और स्कूल संस्कृति को गढ़ने का अनूठा प्रयोग
सांदीपनि विद्यालय में आयोजित प्रशिक्षण शिविर का हुआ समापन।

* नए शैक्षणिक सत्र से पहले 29 शिक्षकों ने पांच दिनों तक किया आत्ममंथन,

* नवाचार, रोबोटिक्स, मॉर्निंग मीटिंग, स्टेम लर्निंग और सकारात्मक स्कूल संस्कृति पर हुआ गहन प्रशिक्षण

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । एक अच्छे विद्यालय की पहचान केवल उसकी इमारत, संसाधनों या परीक्षा परिणामों से नहीं होती, बल्कि उन शिक्षकों से होती है जो स्वयं सीखने की प्रक्रिया को कभी नहीं छोड़ते। इसी सोच को केंद्र में रखकर सान्दीपनि विद्यालय विनोबा, रतलाम में आगामी शैक्षणिक सत्र से पहले एक ऐसा प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इसने शिक्षकों को केवल प्रशिक्षित नहीं किया, बल्कि उन्हें फिर से विद्यार्थी बनने का अवसर भी दिया।

ग्रीष्मावकाश के बाद विद्यार्थियों के विद्यालय आने से पूर्व आयोजित इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य केवल कक्षा शिक्षण को बेहतर बनाना नहीं था, बल्कि एक ऐसी स्कूल संस्कृति को मजबूत करना था जिसमें संवेदनशीलता, नवाचार, समावेशिता और विद्यार्थियों की भावनात्मक जरूरतों को समान महत्व मिले। विद्यालय में आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण में संस्था के सभी 29 शिक्षकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का फोकस इस बात पर रहा कि नई पीढ़ी के विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम नहीं, बल्कि बेहतर सीखने का अनुभव कैसे दिया जाए।

मॉर्निंग मीटिंग से भावनात्मक जुड़ाव तक

प्रशिक्षण में शिक्षकों को यह समझाया गया कि किसी भी विद्यार्थी की सीखने की क्षमता उसके भावनात्मक स्वास्थ्य से गहराई से जुड़ी होती है। मॉर्निंग मीटिंग के दौरान विद्यार्थियों की भावनाओं को समझना, उनकी "फीलिंग चैक" करना, उनका उत्साहवर्धन करना और उन्हें सुरक्षित व सकारात्मक वातावरण देना जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए।

इस सत्र को माधुरी तलेरा, कविता वर्मा और हिना शाह ने “करके सीखो” की अवधारणा पर आधारित चार रोल-प्ले के माध्यम से प्रस्तुत किया। ये रोल-प्ले उप प्राचार्य गजेंद्र सिंह राठौर द्वारा तैयार किए गए थे। इनके जरिए शिक्षकों ने वास्तविक परिस्थितियों में विद्यार्थियों के साथ संवाद और व्यवहार के प्रभावी तरीकों को समझा।

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दक्षता आधारित शिक्षा और एफएलएन पर मंथन

शिक्षक अजय मरमट ने दक्षता आधारित अध्यापन और एफएलएन (Foundational Literacy and Numeracy) के विभिन्न आयामों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने गतिविधि आधारित शिक्षण की आवश्यकता और उसके प्रभावों को उदाहरणों सहित समझाया तथा प्रश्नोत्तरी के माध्यम से शिक्षकों की सहभागिता सुनिश्चित की।

रोबोटिक्स और स्टेम लर्निंग ने बढ़ाया उत्साह

प्रशिक्षण का सबसे आकर्षक हिस्सा रोबोटिक्स और स्टेम आधारित शिक्षण रहा। शिक्षकों को चार समूहों में विभाजित कर कार निर्माण, झूला निर्माण और अन्य क्रियात्मक गतिविधियां कराई गईं। इस दौरान बिंद्राक्षी पंवार और ज्योति मंडलोई ने कोडिंग के माध्यम से स्टेम बेस्ड लर्निंग की अवधारणा को समझाया। चारों समूहों ने अपने-अपने कार्यशील मॉडल तैयार किए और उनकी प्रस्तुति भी दी। इस गतिविधि ने यह संदेश दिया कि आधुनिक शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रयोग, नवाचार और रचनात्मकता भी उसका महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

भोपाल प्रशिक्षण से मिली नई दिशा

हाल ही में भोपाल में आयोजित स्कूल लीडर प्रशिक्षण के अनुभव और महत्वपूर्ण तकनीकों को विद्यालय की प्राचार्य संध्या वोरा और सरिता राजपुरोहित ने साझा किया। उन्होंने बताया कि प्रभावी नेतृत्व और सकारात्मक स्कूल संस्कृति कैसे किसी भी संस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।

कक्षा शिक्षण से लेकर स्कूल संस्कृति तक

प्रशिक्षण के दौरान उप प्राचार्य गजेन्द्र सिंह राठौर ने लेसन प्लानिंग, प्रभावी डिलीवरी, कक्षा शिक्षण के विभिन्न अवयवों और सकारात्मक स्कूल एवं कक्षा संस्कृति पर क्रियात्मक सत्र लिए। उन्होंने शिक्षकों को केवल विषय विशेषज्ञ नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के मार्गदर्शक और प्रेरक बनने की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित किया। इस पूरे प्रशिक्षण की परिकल्पना एवं विषय-वस्तु का निर्माण भी उप प्राचार्य राठौर द्वारा किया गया।

इनकी रही सक्रिय भागीदारी

प्रशिक्षण में प्रधान अध्यापक अनिल मिश्रा, दना सोवणचा, भावना रावत, पिंकी सोलंकी, रूपाली जैन, मंजुलिका खरे, अनीता शर्मा, प्रतिभा तिवारी, शोभा ओझा, राजेंद्र शर्मा, मनीषा चौधरी, राजाराम सेकवाड़िया, प्रदीप वैष्णव, हर्षिता सोलंकी, सरिता राजपुरोहित, हरिओम कौशल सहित अन्य शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

अलग अंदाज में मना जन्मदिन

प्रशिक्षण के दौरान ही शिक्षक ज्योति मंडलोई का जन्मदिन भी मनाया गया। गत वर्ष इसी समय स्कूल के शिक्षक अहमदाबाद स्थित रिवर साइड स्कूल में प्रशिक्षण ले रहे थे। तब वहां ज्योति मंडलोई का जन्मदिन आइस केक काटकर बिल्कुल अलग अंदाज में मनाया गया। इस वर्ष भी उनका जन्मदिन प्रशिक्षण के दौरान आने से गत वर्ष की ही तरह आइस केक काटकर मनाया गया। इस स्नेह ने उन्हें भावुक कर दिया।

निष्कर्ष : शिक्षक वही जो सीखना न छोड़े

यह प्रशिक्षण केवल एक औपचारिक शैक्षणिक गतिविधि नहीं था, बल्कि इस बात का उदाहरण भी था कि जब शिक्षक स्वयं सीखने के लिए तैयार रहते हैं, तब विद्यालयों में परिवर्तन की नई संभावनाएं जन्म लेती हैं। सान्दीपनि विनोबा विद्यालय का यह प्रयास इस बात को रेखांकित करता है कि उत्कृष्ट शिक्षा की शुरुआत उत्कृष्ट शिक्षक से होती है, और उत्कृष्ट शिक्षक वही है जो सीखना कभी नहीं छोड़ता।

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शिक्षकों ने साझा किया सीखने का अनुभव

"मैं पहली बार कक्षाध्यापक बनकर मॉर्निंग मीटिंग कराने जा रही हूं। प्रशिक्षण के बाद अब मैं इसे और बेहतर तरीके से कर पाऊंगी।"
- ज्योति मंडलोई, नव नियुक्त शिक्षक

"सान्दीपनि विनोबा स्कूल में नियमित सर्कल टाइम के दौरान छोटे-छोटे प्रशिक्षण सत्र होते रहते हैं, लेकिन सत्र शुरू होने से पहले आयोजित यह रिफ्रेशर प्रशिक्षण नई ऊर्जा के साथ आगामी अध्यापन में निश्चित रूप से उपयोगी रहेगा।"
- भावना रावत, उच्च माध्यमिक शिक्षक

"सान्दीपनि विद्यालय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनोवेशन में प्रथम स्थान प्राप्त कर चुका है। यहां प्रतिदिन किसी न किसी शैक्षिक नवाचार पर काम होता है। इस प्रशिक्षण में सभी को अपने कौशल साझा करने का अवसर मिला, जो अत्यंत उत्साहवर्धक रहा।"
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हरिओम कौशल, शिक्षक