रतलाम की ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर सहेजने की पहल, INTACH का स्थानीय चैप्टर बनाने की कवायद शुरू

रतलाम की ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण के लिए INTACH का स्थानीय चैप्टर बनाने की पहल शुरू हुई है। राजमहल समेत महत्वपूर्ण धरोहरों के सर्वे और दस्तावेजीकरण की योजना है।

रतलाम की ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर सहेजने की पहल, INTACH का स्थानीय चैप्टर बनाने की कवायद शुरू
रतलाम जिले की धरोहरों को सहेजने की कवायद शुरू।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । रतलाम के महलवाड़े सहित जिले में बिखरी ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण के लिए पहल की तैयारी शुरू हो गई है। भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक धरोहर न्यास इंटेक (INTACH) की स्थानीय शाखा के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इसके तहत जिले की महत्वपूर्ण धरोहरों को चिह्नित कर उनका प्राथमिक सर्वेक्षण एवं दस्तावेजीकरण किया जाएगा। साथ संरक्षण की जरूरत वाली धरोहरों के लिए योजनाबद्ध प्रयास भी होंगे।

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इंटेक देशभर में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण तथा उनके प्रति जन-जागरूकता के लिए कार्यरत संस्था है। रतलाम जिले में भी ऐतिहासिक इमारतों, राजमहलों और किलों, मंदिरों, बावड़ियों, कलात्मक भवनों, भित्तिचित्रों, चित्रकलाओं, कलाकृतियों, पांडुलिपियों, ऐतिहासिक अभिलेखों, दुर्लभ वस्तुओं के संग्रह सहित अनेक प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों की मौजूदगी है। इनमें से कई धरोहरों के संरक्षण और उचित दस्तावेजीकरण की आवश्यकता है।

धरोहर संरक्षण को लेकर हुई बैठक

स्थानीय चैप्टर के गठन की दिशा में गत दिवस सामाजिक कार्यकर्ताओं और धरोहर संरक्षण में रुचि रखने वाले नागरिकों की बैठक आयोजित की गई। इसमें इंटेक के पुराने सदस्य के अलावा, जावरा नवाब के परिवार के सदस्य हशमत अली खान तथा देशभर में मंदिरों के जीर्णोद्धार कार्यों से जुड़े रतलाम निवासी इंटेक सदस्य विजय सोनी ने स्थानीय चैप्टर के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की पहल की।

बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता राजेश घोटीकर, डॉ. श्वेता विंचुरकर, नवोदित वैरागी, नरेंद्र श्रेष्ठ, डॉ. ईश्वर बोराना, अर्जुन पालीवाल, मुकेश शुक्ला, शुभम सिखवाल, महेंद्र भरकुंदीया, जुबेर आलम कुरैशी सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ता एवं सदस्य मौजूद रहे। उपस्थित सदस्यों ने रतलाम की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर विभिन्न सुझाव दिए।

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राजमहल की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई

बैठक में रतलाम राजमहल की वर्तमान स्थिति और उसके संरक्षण को लेकर विशेष चर्चा हुई। इस दौरान बताया गया कि राजमहल के साथ जिले की अन्य महत्वपूर्ण धरोहरों की भी क्रमबद्ध रूप से जानकारी जुटाकर उनका भ्रमण और स्थिति का अध्ययन किया जाएगा। इसके आधार पर ऐसी धरोहरों को चिन्हित किया जाएगा, जिन्हें तत्काल या प्राथमिकता के आधार पर संरक्षण की आवश्यकता है। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि केवल धरोहरों को चिह्नित करने तक सीमित न रहते हुए उनके संरक्षण के लिए योजनाबद्ध तरीके से प्रयास किए जाएं।

प्रशासन और पुरातत्व विभाग के सहयोग से संरक्षण की योजना

प्रस्तावित स्थानीय चैप्टर के माध्यम से जिला प्रशासन, पुरातत्व विभाग तथा सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के सहयोग से धरोहर संरक्षण के प्रयास किए जाएंगे। इसके साथ ही जिले की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में भी काम करने की योजना है। इस पहल का उद्देश्य रतलाम की धरोहरों को संरक्षित करने के साथ उनकी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर सामने लाना भी है।

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युवाओं और विद्यार्थियों को अभियान से जोड़ने पर जोर

बैठक में युवाओं और विद्यार्थियों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना गया। कॉलेज विद्यार्थियों, युवाओं और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े ऐसे लोगों को चिन्हित करने का सुझाव दिया गया, जिनकी इतिहास, कला, संस्कृति और धरोहर संरक्षण में रुचि है। इन्हें इंटेक से जोड़कर संरक्षण अभियान में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया जाएगा।

पहले चरण में सूची और दस्तावेजीकरण

स्थानीय चैप्टर के गठन के साथ ही पहले चरण में रतलाम जिले की महत्वपूर्ण धरोहरों की सूची तैयार करने, उनका प्राथमिक सर्वेक्षण करने और उपलब्ध जानकारी का दस्तावेजीकरण करने का निर्णय लिया गया। इस कार्य में जनभागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना गया है, ताकि ऐसी धरोहरों की जानकारी सामने आ सके जो अभी तक व्यापक स्तर पर चिन्हित या दर्ज नहीं हैं। आगामी कार्ययोजना को अंतिम रूप देने के लिए शीघ्र ही पुनः बैठक आयोजित की जाएगी। इसके बाद जिले की धरोहरों के संरक्षण की दिशा में व्यवस्थित रूप से काम शुरू करने की तैयारी है।