शासन-प्रशासन को दो टूक चेतावनी ! मंदिरों की जमीन से अवैध कब्जे हटाएं अन्यथा मैदान में उतरेगा मठ-मंदिर संघ

रतलाम में मंदिरों की जमीन से कब्जे हटाने की मांग पर राष्ट्रीय मठ मंदिर संघ ने आंदोलन की चेतावनी दी। निजी देवस्थलों की अलग सूची और पुजारियों के अधिकार सुरक्षित करने की मांग उठाई।

शासन-प्रशासन को दो टूक चेतावनी ! मंदिरों की जमीन से अवैध कब्जे हटाएं अन्यथा मैदान में उतरेगा मठ-मंदिर संघ
राष्ट्रीय मठ मंदिर संघ के प्रदेश अध्यक्ष रघु बैरागी प्रेसवार्ता में जानकारी देते हुए। साथ हैं अन्य पदाधिकारी।

निजी देवस्थलों की अलग सूची बनाने और पुजारियों के वंशानुगत अधिकार दर्ज करने की मांग

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । जिले के प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिरों की जमीन (Temple Land) पर अवैध कब्जों (Encroachment) को लेकर राष्ट्रीय मठ मंदिर संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ ने शासन-प्रशासन को सीधे आंदोलन की चेतावनी दी है। मांग है कि मंदिरों की जमीन तत्काल अतिक्रमणमुक्त कराई जाए। निजी देवस्थलों की अलग सूची बने। पुजारियों के पारंपरिक और कानूनी अधिकार भी सुरक्षित किए जाएं।

राष्ट्रीय मठ मंदिर संघ (national math mandir association) द्वारा शुक्रवार को रतलाम प्रेस क्लब (Ratlam Press Club) भवन पर प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया। इसमें संघ के प्रदेश अध्यक्ष रघुदास बैरागी ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मंदिरों की संपत्तियों और पुजारियों के अधिकारों को लेकर कई बार शासन का ध्यान आकर्षित कराया गया है। इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। न्यायालयों की स्पष्ट गाइडलाइन, सरकार और कलेक्टर के आदेशों के बाद भी कई मामलों में एसडीएम और तहसीलदार स्तर पर कार्रवाई नहीं हो रही है। नतीजतन, मंदिरों की जमीन पर अवैध कब्जे बरकरार हैं।

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भू-माफियाओं के विरुद्ध हो सख्त कार्रवाई

संघ ने मंदिरों की कृषि और गैर-कृषि भूमि से अवैध कब्जे हटाने की मांग की। मूल पुजारियों और सेवादारों को उनके वैधानिक अधिकार दिलाने पर जोर दिया। मंदिरों की जमीन पर अनधिकृत कब्जा करने वालों और कथित भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठाई। संघ का कहना है कि मंदिरों की संपत्तियों की सुरक्षा के साथ पुजारियों के अधिकारों का संरक्षण भी जरूरी है।

निजी देवस्थलों की अलग सूची बने

राष्ट्रीय मठ मंदिर संघ ने मध्यप्रदेश शासन के वर्ष 2008 के आदेशों और न्यायालयीन निर्णयों का हवाला दिया। संघ ने निजी देवस्थलों की अलग सूची तैयार करने की मांग की। निजी देवस्थलों से जुड़े पुजारियों के वैधानिक और वंशानुगत अधिकार राजस्व अभिलेखों में दर्ज किए जाएं। इससे भविष्य में भूमि संबंधी विवादों को रोका जा सकेगा। संघ ने निजी देवस्थलों पर शासकीय मंदिरों के नियम बिना उचित आधार के लागू करने का भी विरोध किया। उसका कहना है कि निजी और शासकीय मंदिरों की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। इससे संपत्तियों के प्रबंधन और अधिकारों से जुड़े विवादों का समाधान आसान होगा।

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पुराने राजस्व रिकॉर्ड से हो सर्वेक्षण

संघ ने मंदिरों की जमीन और संपत्तियों का पुराने राजस्व अभिलेखों के आधार पर सर्वेक्षण कराने की मांग की। अवैध बिक्री और कब्जों से जुड़ी शिकायतों की जांच हो। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। मंदिरों की संपत्तियों की सुरक्षा के लिए नियमित समीक्षा व्यवस्था भी लागू हो। संघ ने यह भी मांग की कि जांच में मंदिरों की जमीन का अवैध हस्तांतरण सामने आने पर उसे वापस देवस्थानों के नाम दर्ज कराया जाए।

जमीन की अनधिकृत बिक्री पर रोक लगे

संघ ने निजी मंदिरों की जमीन की अनावश्यक और अनधिकृत बिक्री रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की। देवस्थलों की संपत्तियों का संरक्षण जरूरी है। इससे धार्मिक परंपराएं सुरक्षित रहेंगी। मंदिरों की जमीन का उपयोग भी निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप हो सकेगा।

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पुजारियों को किसान क्रेडिट कार्ड मिले

संघ ने मंदिरों की कृषि भूमि पर निर्भर पात्र पुजारियों को किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा देने की मांग की। यह सुविधा नियमानुसार उपलब्ध कराई जाए। संघ के अनुसार, पुजारी और सेवादार पूजा-अर्चना, मंदिरों की देखरेख और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके अधिकारों और आजीविका से जुड़े मुद्दों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।

अब आदेश से नहीं चलेगा काम

संघ ने शासन-प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी कि अब केवल आदेश जारी करने से काम नहीं चलेगा। जमीन पर कार्रवाई भी दिखनी चाहिए। मंदिरों से अतिक्रमण नहीं हटाए गए और पुजारियों को उनके अधिकार नहीं मिले तो संघ स्वयं मैदान में उतरेगा और अतिक्रमण हटाएगा। अगर इस दौरान कोई भी अप्रिय घटना घटित होती है तो इसके लिए शासन-प्रशासन जिम्मेदार होगा। प्रेसवार्ता में अखिल भारतीय पुजारी संघ के अध्यक्ष मुकेश शर्मा, महेंद्रदास बैरागी (नामली), रतनदास बैरागी (उपलई) तथा रमेशदास बैरागी सहित अन्य पुजारी उपस्थित रहे।

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