रतलाम जिले के 1,780 देवस्थानों की 4,622 हेक्टेयर भूमि का शासकीय रिकॉर्ड से होगा सत्यापन, कलेक्टर ने सभी अनुविभागीय अधिकारियों को दिया आदेश
रतलाम जिले के 1,780 शासन प्रबंधित देवस्थानों की 4,622.02 हेक्टेयर भूमि का राजस्व अभिलेखों से सत्यापन होगा। कलेक्टर अजय कटेसरिया ने खसरा, बी-1, नक्शे और देवस्थान पंजी से मिलान के निर्देश दिए हैं।
पुजारियों के नाम दर्ज भूमिस्वामी प्रविष्टियों की भी होगी जांच, खसरा-बी-1 से देवस्थान पंजी तक मिलान के निर्देश
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । जिले के शासन प्रबंधित देवस्थानों की हजारों हेक्टेयर भूमि के राजस्व रिकॉर्ड की अब व्यापक स्तर पर जांच होगी। कलेक्टर अजय कटेसरिया ने जिले के 1,780 शासन प्रबंधित देवस्थानों की 4,622.02 हेक्टेयर भूमि का राजस्व अभिलेखों, खसरा, बी-1, नक्शे, पूर्व अभिलेखों और देवस्थान पंजी से मिलान कर सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही देवस्थान भूमि के रिकॉर्ड में पुजारी या किसी निजी व्यक्ति के नाम से दर्ज भूमिस्वामी संबंधी प्रविष्टियों की भी जांच कर नियमानुसार सुधार कराया जाएगा।
देवस्थानों की जमीनों पर अवैध कब्जों और उनके अनधिकृत उपयोग को लेकर मांग उठती रही है लेकिन कभी किसी कलेक्टर ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। यह मामला कलेक्टर अजय कटेसरिया के संज्ञान में आया तो उन्होंने बड़ा निर्णय ले डाला। कलेक्टर ने इस संबंध में जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारियों (राजस्व), तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को आदेश जारी किए हैं। आदेश में शासन प्रबंधित देवस्थानों की कृषि एवं अन्य भूमि को अनधिकृत नामांतरण, विक्रय, बंधक, कब्जे, अतिक्रमण और अन्य प्रकार के दुरुपयोग से सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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देवस्थान की जमीन पर स्वामित्व देवता का, पुजारी का नहीं
कलेक्टर के आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के स्टेट ऑफ मध्यप्रदेश एवं अन्य बनाम पुजारी उत्थान एवं कल्याण समिति एवं अन्य मामले में 6 सितंबर 2021 को दिए गए निर्णय का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार मंदिर से संबद्ध भूमि के स्वामी अधिष्ठाता देवता हैं और उन्हें विधि की दृष्टि से विधिक व्यक्तित्व प्राप्त है।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि केवल पुजारी होने के आधार पर किसी व्यक्ति का देवस्थान की संपत्ति पर व्यक्तिगत स्वामित्व या भूमिस्वामी अधिकार स्थापित नहीं होता। इसलिए शासन प्रबंधित देवस्थानों की भूमि के अभिलेखों में भूमिस्वामी के रूप में संबंधित देवता अथवा देवस्थान का नाम नियमानुसार दर्ज होना सुनिश्चित किया जाएगा।
यदि किसी पुजारी, व्यवस्थापक या अन्य निजी व्यक्ति का नाम व्यक्तिगत भूमिस्वामी के रूप में दर्ज है, तो उसकी भी जांच की जाएगी। हालांकि सक्षम न्यायालय का स्वत्व संबंधी विशिष्ट और लागू आदेश होने की स्थिति को इससे अलग रखा गया है।
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प्रबंधन की प्रविष्टि में कलेक्टर होंगे प्रबंधक
शासन प्रबंधित अथवा राज्य शासन में निहित सार्वजनिक देवस्थानों के संबंध में लागू शासन निर्देशों और राजस्व अभिलेख प्रारूप के अनुसार प्रबंधकीय प्रविष्टियां भी अद्यतन की जाएंगी। ऐसे मामलों में देवस्थान का प्रबंधन “मध्यप्रदेश शासन द्वारा, कलेक्टर जिला रतलाम, प्रबंधक” के रूप में दर्ज किया जाएगा। यह प्रविष्टि प्रबंधकीय क्षमता में होगी। जहां पुजारी वास्तव में पूजा-अर्चना और संबंधित दायित्वों का निर्वहन कर रहा है, वहां नियमों के अनुसार आवश्यक होने पर उसका नाम टिप्पणी कॉलम में केवल “पुजारी” की हैसियत से दर्ज किया जा सकेगा। इससे उसे भूमि पर स्वामित्व, भूमिस्वामी अधिकार अथवा हस्तांतरण का अधिकार नहीं मिलेगा।
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रतलाम में 623 देवस्थानों की 1,730.50 हेक्टेयर भूमि
जिले में सबसे अधिक शासन प्रबंधित देवस्थान रतलाम तहसील/क्षेत्र में हैं। यहां 623 देवस्थानों की 1,730.50 हेक्टेयर भूमि दर्ज है। जावरा में 316 देवस्थानों की 791.01 हेक्टेयर, पिपलौदा में 319 की 913.65 हेक्टेयर, आलोट में 291 की 662.52 हेक्टेयर, ताल में 154 की 304.09 हेक्टेयर, सैलाना में 64 की 195.95 हेक्टेयर, बाजना में 2 की 2.36 हेक्टेयर तथा रावटी में 11 देवस्थानों की 21.94 हेक्टेयर भूमि दर्ज है। इस तरह जिले के भीतर दर्ज 1,780 शासन प्रबंधित देवस्थानों की कुल भूमि 4,622.02 हेक्टेयर है।
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जिले के बाहर के 41 देवस्थानों की जमीन भी रतलाम में
आदेश में ऐसे 41 देवस्थानों का भी विवरण दिया गया है जो जिले के बाहर स्थित हैं, लेकिन उनकी 212.621 हेक्टेयर भूमि रतलाम जिले में स्थित है। इनमें रतलाम क्षेत्र में 13 देवस्थानों की 139.205 हेक्टेयर, जावरा में 11 की 16.049 हेक्टेयर, पिपलौदा में 10 की 28.657 हेक्टेयर, आलोट में एक की 1.825 हेक्टेयर, ताल में तीन की 22.045 हेक्टेयर, सैलाना में दो की 4.330 हेक्टेयर तथा रावटी में एक देवस्थान की 0.510 हेक्टेयर भूमि शामिल है।
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