विश्व के सबसे गर्म शहरों में शामिल रतलाम को हरित बनाने का संकल्प, 'त्रिवेणी वन रोपण महाअभियान' का शुभारंभ

विश्व के 10 सबसे गर्म शहरों में शामिल रतलाम में 'त्रिवेणी वन रोपण महाअभियान' का शुभारंभ हुआ। आरएसएस पदाधिकारियों ने हर परिवार से कम से कम एक त्रिवेणी लगाने और पौधों को वृक्ष बनने तक संरक्षित करने का आह्वान किया।

विश्व के सबसे गर्म शहरों में शामिल रतलाम को हरित बनाने का संकल्प, 'त्रिवेणी वन रोपण महाअभियान' का शुभारंभ
रतलाम में त्रिवेणी वन रोपण महाअभियान का हुआ शुभारंभ।

वक्ताओं का आह्वान—हर परिवार लगाए कम से कम एक त्रिवेणी, पौधों को वृक्ष बनने तक संरक्षित करने का लिया संकल्प

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । विश्व के 10 सबसे गर्म शहरों में शामिल हो चुके रतलाम को दीर्घकालिक शीतलता प्रदान करने और पर्यावरणीय संतुलन स्थापित करने के उद्देश्य से 'त्रिवेणी वन रोपण महाअभियान' का श्रीगणेश रविवार को हुआ। इस दौरान वक्ताओं ने त्रिवेणी रोपण की आवश्यकता, महत्व और इसकी संपूर्ण संकल्पना पर विस्तार से प्रकाश डाला। अतिथियों ने महाअभियान के पोस्टर का विमोचन कर उपस्थितजनों को त्रिवेणी रोपने का संकल्प भी दिलाया।

त्रिवेणी वन रोपण महाअभियान को लेकर रविवार को विधायक सभागृह, बरबड़, रतलाम में महती बैठक आयोजित की गई। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के रतलाम-झाबुआ विभाग के संघ चालक तेजराम मांगरोदा एवं रतलाम विभाग के विभाग प्रचारक कृष्णकांत पांडेय मुख्य वक्ता रहे। हार्टफुलनेस संस्था के डॉ. नीलेश शुक्ला भी मंचासीन रहे।

प्रकृति का संतुलन बिगड़ा तो उसका दंड भी प्रकृति ही देती है : तेजराम मांगरोदा

बैठक को संबोधित करते हुए विभाग संघ चालक तेजराम मांगरोदा ने कहा कि जिस प्रकार वात, पित्त और कफ में असंतुलन होने पर शरीर प्रभावित होता है, उसी प्रकार जल, वायु और अग्नि में असंतुलन होने पर प्रकृति भी असंतुलित हो जाती है। मनुष्य प्रकृति को नियंत्रित नहीं कर सकता, वह स्वयं अपना संतुलन स्थापित करती है। चाहे वह बाढ़ हो, भूकंप हो या महामारी—प्रकृति अपने नियमों के अनुसार दंड अवश्य देती है।

उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति पर्यावरण-अनुकूल होने के साथ प्रकृति से तादात्म्य और एकात्म स्थापित करने वाली रही है। भगवान श्रीकृष्ण से लेकर हमारे सभी देवी-देवता तथा जैन दर्शन के सभी तीर्थंकर वृक्षों और जीवों के बिना अधूरे हैं। इसके विपरीत वनों का विनाश करने वाली विश्व की 10 बड़ी कंपनियां पश्चिम की हैं। उन्होंने कहा कि ईको सिस्टम का सीधा प्रभाव हमारे स्वास्थ्य, मन, विचार और व्यवहार पर पड़ता है।

मांगरोदा ने राजस्थान की प्रकृति-प्रेमी अमृता देवी जैसे पर्यावरण रक्षकों के बलिदान की कहानियां बच्चों को सुनाने का आह्वान किया। उन्होंने महर्षि कण्व और शकुंतला के प्रकृति प्रेम से प्रेरणा लेने तथा त्रिवेणी वन रोपण महाअभियान से जुड़कर रतलाम को पुनः हरित बनाने का आग्रह किया।

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संकल्प तभी सफल होगा, जब पौधे वृक्ष बनेंगे : कृष्णकांत पांडेय

रतलाम विभाग के विभाग प्रचारक कृष्णकांत पांडेय ने आम के वृक्ष में आने वाले बौर का उदाहरण देते हुए कहा कि संकल्प तो बहुत से लोग लेते हैं, लेकिन सफल वही होते हैं जो विकल्प रहित होकर अपने लक्ष्य पर डटे रहते हैं। उन्होंने कहा कि त्रिवेणी वन रोपण महाअभियान में विकल्प नहीं है। केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं, बल्कि पौधे को वृक्ष बनाने की यात्रा ही इस अभियान की वास्तविक सफलता होगी।

उन्होंने कहा कि रतलाम की आबादी के अनुरूप अधिक से अधिक त्रिवेणियां लगाना और उन्हें वृक्ष बनाना इस अभियान का लक्ष्य है। इसके लिए चरणबद्ध प्रयास करने होंगे। विभाग प्रचारक ने लोगों से अपने पूर्वजों, धार्मिक एवं मांगलिक आयोजनों सहित अन्य विशेष अवसरों की स्मृतियों को त्रिवेणी के माध्यम से चिरस्थायी बनाने का आह्वान किया। उन्होंने उपस्थितजनों को अभियान को सफल बनाने का संकल्प भी दिलाया।

पीपीटी और विशेष वार्तालाप के माध्यम से समझाया त्रिवेणी रोपण का महत्व

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने 'त्रिवेणी' (पीपल, नीम और बरगद के पौधों) तथा भारत माता का पूजन कर किया। अतिथियों का परिचय देवाशीष पौराणिक तथा डॉ. हितेश पाठक ने दिया।

इसके पश्चात पर्यावरण मित्र अशोक पाटीदार ने पीपीटी के माध्यम से पर्यावरण एवं जीवों के संरक्षण के लिए वृक्षों की आवश्यकता पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने त्रिवेणी के धार्मिक, आध्यात्मिक, वास्तुशास्त्रीय तथा वैज्ञानिक आधार पर उसके महत्व को समझाया। इस अवसर पर रतलाम में बढ़ते तापमान और त्रिवेणी रोपण को लेकर तैयार विशेष वार्तालाप का भी प्रसारण किया गया।

अभियान में यह रहेगा खास

  • त्रिवेणी रोपने के लिए स्वयंसेवकों द्वारा गड्ढे तैयार करने, उन्हें नियमित खाद-पानी देने और पांच साल तक उनके संरक्षण की जिम्मेदारी निभाई जाएगी ताकि वे वृक्ष बन सकें।
  • त्रिवेणी रोपने का कार्य समाज द्वारा ही किया जाएगा।
  • त्रिवेणी (बरगद, पीपल और नीम) रोपने के लिए लोगों को पंजीयन करवाना होगा।
  • एक व्यक्ति / परिवार एक से अधिक जितनी भी चाहे त्रिवेणी रोप सकता है।
  • त्रिवेणी की जीयो टैगिंग की जाएगी और उन्हें एक कोड भी दिया जाएगा।
  • त्रिवेणी रोपने वाले व्यक्तियों / परिवारों हर रविवार को अपने परिजन के साथ मौके पर जा सकेंगे और अपनी त्रिवेणी के साथ समय बिता सकेंगे। वे इनके साथ सेल्फी / फोटो भी ले सकेंगे।
  • त्रिवेणी वन रोपण अभियान अलग-अलग चरणों में चलेगा। भाई-बहन की पहाड़ी के बाद 8लेन के किनारे और उसके बाद शहर में आवश्यकता अनुसार रोपण होगा।
  • अभियान को सफल बनाने के लिए सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थाओं के प्रमुखों, समाजों के प्रमुखों, शहर के सभी मोहल्लों के प्रमुखों की बैठकें भी आगामी दिनों में होंगी।

महाअभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आए महत्वपूर्ण सुझाव

बैठक में महाअभियान को सफल बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण सुझाव भी सामने आए। इनमें स्कूलों में त्रिवेणी वन रोपण महाअभियान की जानकारी पहुंचाने, वार्डवार एवं मोहल्लावार टीमों का गठन कर व्यापक प्रचार-प्रसार करने तथा शासकीय सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए त्रिवेणी रोपण जैसे कार्यों की अनिवार्यता सुनिश्चित करने के सुझाव प्रमुख रहे। अभियान की शुरुआत में ही शहर के प्रबुद्धजनों ने 5 से 25 तक त्रिवेणी रोपणे का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ। संचालन पत्रकार अदिति मिश्रा ने किया तथा आभार प्रदर्शन शिक्षाविद् विम्पी छाबड़ा ने किया। आयोजन में बड़ी संख्या में मातृशक्ति, संत, प्रकृति-प्रेमी, स्वयंसेवक, धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के पदाधिकारी सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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