रतलाम के धार्मिक इतिहास में नया अध्याय ! महंत आनंद गिरि बने महामंडलेश्वर, पहली बार शहर में हुआ पट्टाभिषेक महोत्सव

रतलाम में पहली बार महामंडलेश्वर पट्टाभिषेक महोत्सव आयोजित हुआ। सैलाना के महंत आनंद गिरि महाराज को वैदिक विधि-विधान के साथ महामंडलेश्वर पद पर अभिषिक्त किया गया। समारोह में अखाड़ा परिषद अध्यक्ष स्वामी रवींद्र पुरी महाराज सहित देशभर के संत शामिल हुए।

रतलाम के धार्मिक इतिहास में नया अध्याय ! महंत आनंद गिरि बने महामंडलेश्वर, पहली बार शहर में हुआ पट्टाभिषेक महोत्सव
रतलाम में पहली बार हुए महामंडलेश्वर पट्टाभिषेक आयोजन में महंत आनंद गिरी बने महामंडलेश्वर।

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष स्वामी रवींद्र पुरी महाराज सहित देशभर के संतों की गरिमामयी उपस्थिति

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । मालवा की धार्मिक नगरी रतलाम ने बुधवार को एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण का साक्षी बनकर अपने आध्यात्मिक इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। श्री पंचायती श्री निरंजनी अखाड़ा के तत्वावधान में आयोजित भव्य महामंडलेश्वर पट्टाभिषेक महोत्सव में सैलाना क्षेत्र के ग्राम आडवाणिया स्थित आश्रम के पूज्य महंत श्रीश्री 1008 आनंद गिरि महाराज का वैदिक विधि-विधान और संत परंपराओं के अनुरूप महामंडलेश्वर पद पर अभिषेक किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत सुबह भव्य संत पेशवाई से हुई। श्री राम मंदिर से प्रारंभ हुई शोभायात्रा में सुसज्जित रथ, आकर्षक धार्मिक झांकियां, संत-महात्माओं का वैभवशाली सान्निध्य और बड़ी संख्या में शामिल श्रद्धालुओं ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। पेशवाई नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए सैलाना रोड स्थित श्रीजी पैलेस पहुंची, जहां मुख्य समारोह आयोजित किया गया। संतों के जयघोष, शंखनाद और धार्मिक ध्वनियों के बीच निकली यह यात्रा शहरवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र रही।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ पट्टाभिषेक

मुख्य समारोह में अखाड़ा परंपरा के अनुसार वैदिक मंत्रोच्चार, पूजन-अर्चन और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच महंत आनंद गिरि महाराज का पट्टाभिषेक संपन्न हुआ। संतों एवं विद्वानों की उपस्थिति में उन्हें विधिवत महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान की गई।

इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में वक्ताओं ने सनातन परंपराओं के संरक्षण, अखाड़ा व्यवस्था की गौरवशाली विरासत तथा समाज में आध्यात्मिक चेतना के विस्तार पर अपने विचार रखे।

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देश के प्रमुख संतों का मिला सान्निध्य

समारोह में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं 13 अखाड़ों के अध्यक्ष 1008 स्वामी रवींद्र पुरी महाराज की अध्यक्षता रही। इसके अलावा कार्यक्रम में प्रमुख रूप से निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज, आनंद अखाड़ा पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरी महाराज, महामंडलेश्वर वैराग्यानंद गिरी महाराज, पंचायती श्री निरंजनी अखाड़ा के सचिव महंत रामरतन गिरी महाराज, उज्जैन चारधाम आश्रम के महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद महाराज, सहित देशभर से पधारे अनेक संत, महात्मा और धर्माचार्य उपस्थित रहे।

श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह

आयोजनकर्ता संस्था शिवोदय शिवशक्ति साधना सेवा संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि आयोजन को लेकर रतलाम सहित आसपास के जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों के श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

संस्था के अध्यक्ष युवराज सिंह परिहार, सचिव महर्षि संजय शिवशंकर दवे, महामंत्री काजल गुरु (जागीरदार), सनातन धर्म सभा के संजय दवे, समरथ पाटीदार सहित अन्य पदाधिकारियों ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी संतों, श्रद्धालुओं एवं कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।

इस धार्मिक अनुष्ठान की विशेष बात यह रही कि रतलाम में पहली बार इतने बड़े स्तर पर किसी संत का महामंडलेश्वर पट्टाभिषेक संपन्न हुआ, जिससे यह आयोजन धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से ऐतिहासिक बन गया।

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गुरुकृपा और समाज सेवा का दायित्व : आनंद गिरि महाराज

महामंडलेश्वर पद पर अभिषिक्त होने के बाद पूज्य आनंद गिरि महाराज ने इसे व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि गुरुजनों की कृपा और समाज के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी बताया।

उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार, आध्यात्मिक जागरण और लोककल्याण के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए वे पूर्ण समर्पण के साथ कार्य करेंगे।