तैयारियों ने पकड़ा जोर ! महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित होगा ‘कालिका माता लोक’, अष्टकोणीय स्वरूप में विकसित होगा झाली तालाब परिसर
रतलाम में कालिका माता लोक विकसित करने की तैयारी शुरू। महाकाल लोक की तर्ज पर कालिका माता मंदिर परिसर, झाली तालाब, पार्किंग, गार्डन और श्रद्धालु सुविधाओं का होगा व्यापक विकास।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद तेज हुई तैयारी, झाली तालाब से मंदिर परिसर तक होगा व्यापक सौंदर्यीकरण
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश की आध्यात्मिक और पुरातात्विक धरोहरों को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के अनुरूप अब रतलाम में कालिका माता लोक विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। यह परियोजना उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित की जाएगी, जिससे कालिका माता मंदिर परिसर को नया और आकर्षक स्वरूप मिलेगा।
इसी संबंध में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री एवं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप ने एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित कर प्रस्तावित कार्ययोजना की समीक्षा की। बैठक में महापौर प्रहलाद पटेल और कलेक्टर मिशा सिंह सहित संबंधित अधिकारियों ने भाग लिया तथा मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और विकास कार्यों पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक के दौरान इंजीनियरों द्वारा प्रस्तुत कार्ययोजना में बताया गया कि कालिका माता मंदिर परिसर का नया स्वरूप धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा। प्रस्तावित योजना के अनुसार झाली तालाब परिसर को अष्टकोणीय (ऑक्टागोनल) स्वरूप में विकसित किया जाएगा।
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हर कोण पर होगा मां दुर्गा की झांकियां
अष्टकोणीय संरचना के प्रत्येक कोण पर माता के विभिन्न स्वरूपों की आकर्षक झांकियां स्थापित की जाएंगी। यहां श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों (शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री) के दर्शन कर सकेंगे।
पार्किंग, फूड स्टॉल जैसी सुविधाएं भी होंगी विकसित
बैठक में कालिका माता मंदिर के विस्तृत स्वरूप, झाली तालाब क्षेत्र के विकास, उद्यान (गार्डन), भोजन स्टॉल, पार्किंग जोन, टॉयलेट ब्लॉक तथा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए छायादार मार्ग सहित विभिन्न व्यवस्थाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों ने इन सभी बिंदुओं को शामिल करते हुए समग्र विकास की कार्ययोजना तैयार की।
परियोजना के पूर्ण होने के बाद कालिका माता मंदिर परिसर न केवल धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगा, बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण आकर्षण के रूप में उभरेगा।
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