बड़ा हादसा ! सरकारी अस्पताल के एनआईसीयू में आधी रात को वार्मर में लगी आग, तीन नवजात झुलसे; एक बच्ची की इलाज के दौरान मौत

छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के एनआईसीयू में वॉर्मर मशीन में आग लगने से तीन नवजात झुलस गए। एक बच्ची की इलाज के दौरान मौत हो गई, दो की हालत गंभीर है।

बड़ा हादसा ! सरकारी अस्पताल के एनआईसीयू में आधी रात को वार्मर में लगी आग, तीन नवजात झुलसे; एक बच्ची की इलाज के दौरान मौत
छिंदवाड़ा के जिला अस्पताल के एनआईसीयू के वार्मर में आग लगने से तीन बच्चे झुलसे, एक की मौत। AI जनरेटेड इमेज।

पीडियाट्रिक सर्जन नहीं होने से बच्ची को जबलपुर किया गया था रैफर

एसीएन टाइम्स @ छिंदवाड़ा । जिला अस्पताल से दिल-दहला देन वाली घटना सामने आई है। यहां आधी रात को नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) के वार्मर में आग लगने से तीन नवजात बच्चे झुलस गए। अस्पताल में पीडियाट्रिक सर्जन नहीं होने से एक बच्ची को जबलपुर रैफर किया गया था लेकिन उसकी मौत हो गई। जान गंवाने वाली बच्ची का जन्म हादसे से महज कुछ घंटे पहले ही हुआ था। 

Google NewsFollow Us

जिस अस्पताल में जिंदगी बचाने की उम्मीद लेकर परिवार अपने नवजात बच्चों को सौंपते हैं, उसी अस्पताल में होने वाले हादसे उनकी जान ले लेते हैं। मामला जिला मुख्यालय पर स्थित सबसे बड़े सरकारी अस्पताल का है। यहां की नवजात एनआईसीयू में शनिवार देर रात वॉर्मर मशीन में आग लग गई। हादसे में वार्मर में रखे तीन नवजात झुलस गए। इनमें रात 10 बजे जन्मी एक बच्ची शामिल है जिसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। झुलसे दोनों बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है, इनकी उम्र 6 से 12 दिन है। जिस समय हादसा हुआ एनआईसीयू में लगभग 30 नवजात बच्चे और 3 लोगों का स्टाफ था।

ये भी पढ़ें

बताया जा रहा है कि वॉर्मर में स्पार्किंग के बाद आग लगी। कुछ ही पलों में आग की लपटों ने उपकरण को अपनी चपेट में ले लिया। एनआईसीयू में मौजूद स्टाफ ने तत्काल स्थिति संभालने का प्रयास किया और झुलसे नवजातों को उपचार दिया। महज चार घंटे पहले जन्मी बच्ची की स्थिति ज्यादा नाजुक होने से जिसे जिले में पीडियाट्रिक सर्जन नहीं होने के कारण जबलपुर के मेडिकल कॉलेज रैफर किया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

रात 2 बजे हुआ हादसा

जिला अस्पताल की सिविल सर्जन डॉ. कंचन दुबे ने मीडिया को बताया कि हादसा रात करीब दो बजे हुआ। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वॉर्मर के फिलामेंट में स्पार्किंग होने के कारण आग लगी। अस्पताल प्रबंधन ने घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

ये भी पढ़ें

फायर सेफ्टी इंतजामों पर उठ रहे सवाल

इस हादसे ने अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और फायर सेफ्टी इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर एनआईसीयू जैसे संवेदनशील वार्ड में, जहां नवजात बच्चे पूरी तरह अस्पताल की व्यवस्था और मशीनों पर निर्भर होते हैं। वहां सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक बेहद गंभीर परिणाम दे सकती है। सवाल सिर्फ इस हादसे की जांच का नहीं है, बल्कि यह भी है कि प्रदेश के अस्पतालों में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा इंतजाम कितने पुख्ता हैं। एक नवजात की मौत ने एक परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया है और दो मासूम अब भी जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में इस हादसे की जांच और जिम्मेदारी तय होने के साथ-साथ अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर समीक्षा भी जरूरी हो गई है।

विधानसभा में उठा मामला

छिंतवाड़ा की घटना को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अस्पताल इलाज और जीवन बचाने का भरोसा देते हैं, लेकिन भाजपा शासन में अस्पताल ही जान के दुश्मन बनते जा रहे हैं। सिंघार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से प्रदेश के सभी अस्पतालों का तत्काल फायर ऑडिट कराने और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

ये भी पढ़ें