स्टाइपेंड बढ़ाने के लिए रतलाम सहित प्रदेशभर के MBBS इंटर्न्स डॉक्टर लामबंद, मानदेय ₹30 हजार मासिक करने की मांग की
रतलाम मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण रैली निकाली। इंटर्न्स ने ₹30 हजार मासिक स्टाइपेंड, 6% वार्षिक वृद्धि और सभी मेडिकल कॉलेजों में समान मानदेय की मांग की।
काली पट्टी बांध कर किया काम, रैली निकाली, स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडेय शासकीय मेडिकल कॉलेज रतलाम के एमबीबीएस इंटर्न्स एवं भावी इंटर्न्स ने स्टाइपेंड में सम्मानजनक वृद्धि की मांग को लेकर कॉलेज परिसर में रैली निकाली। इस दौरान इंटर्न्स ने सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित किया। उनका कहना है कि 24 घंटे सेवाएं देने के बाद भी उन्हें बहुत कम स्टाइपेंड दिया जाता है जिसे 30 हजार रुपए मासिक किया जाए।
रैली बास्केटबॉल कोर्ट से शुरू होकर अस्पताल गेट होते हुए प्रशासनिक भवन तक पहुंची। इसमें बड़ी संख्या में इंटर्न डॉक्टर शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों, इसका भी विशेष ध्यान रखा गया। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के नाम एक ज्ञापन भी कॉलेज प्रबंधन को सौंपा। इसमें उन्होंने बताया कि वर्तमान में मध्यप्रदेश में मिलने वाला ₹14,337 प्रतिमाह का स्टाइपेंड उनकी जिम्मेदारियों, कार्यभार और लगातार बढ़ती महंगाई के अनुरूप नहीं है। वे आपातकालीन सेवाएं, नाइट ड्यूटी, वार्ड, ऑपरेशन थिएटर, प्रसूति सेवाओं सहित अस्पताल की नियमित चिकित्सा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसके बावजूद मिलने वाला मानदेय सम्मानजनक नहीं है।
मप्र में अन्य राज्यों से कम स्टाइपेंड
इंटर्न्स ने बताया कि पूरे देश में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) का पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण व्यवस्था समान होने के बावजूद मध्यप्रदेश में स्टाइपेंड कई राज्यों की तुलना में काफी कम है। आवेदन पत्र के अनुसार ओडिशा में ₹44,319, पश्चिम बंगाल में ₹43,099, कर्नाटक में ₹30,000, बिहार में ₹27,000 और केरल में ₹26,000 प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जबकि मध्यप्रदेश में केवल ₹14,337 प्रतिमाह मिल रहा है।
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हर वर्ष 6 प्रतिशत महंगाई भत्ता भी लागू हो
इंटर्न डॉक्टरों ने मांग की है कि प्रदेश के सभी शासकीय एवं निजी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न्स का मासिक स्टाइपेंड बढ़ाकर न्यूनतम ₹30 हजार किया जाए। इसके साथ ही प्रत्येक वर्ष 6 प्रतिशत महंगाई भत्ता (डीए) स्वतः लागू किया जाए, ताकि बार-बार आंदोलन या ज्ञापन देने की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने यह भी मांग की कि सभी मेडिकल कॉलेजों में समान स्टाइपेंड लागू किया जाए और इंटर्न्स के साथ आर्थिक असमानता समाप्त की जाए।
अकुश श्रमिक के वेतन से भी कम मानदेय
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि मध्यप्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में छात्रों से प्रतिवर्ष लगभग एक लाख रुपये तक की फीस ली जाती है, जबकि इंटर्नशिप के दौरान मिलने वाला स्टाइपेंड दैनिक आधार पर राज्य के अकुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन से भी कम बैठता है। इससे अधिकांश इंटर्न्स को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और उन्हें अपने परिवार पर निर्भर रहना पड़ता है।
इंटर्न्स ने मुख्यमंत्री और चिकित्सा शिक्षा विभाग से मांगों पर संवेदनशीलता के साथ शीघ्र निर्णय लेने की अपील करते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो उन्हें उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
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