'श्रीकृष्ण मुस्लिम थे, 5 वक्त नमाज पढ़ते थे...' : रेप केस में दोषी मौलाना के वायरल बयान पर मचा बवाल, श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक का दिया गलत हवाला, FIR दर्ज
उप्र के इटावा के मौलाना जर्जिस अंसारी का श्रीकृष्ण को लेकर दिया गया विवादित बयान फिर वायरल हो रहा है। गीता के श्लोक की अपनी व्याख्या के आधार पर किए दावे पर विवाद छिड़ गया है। मामले में एफआईआर दर्ज हो चुक है। मौलाना के रेप सहित अन्य आपराधिक मामलों की भी चर्चा हो रही है।
गीता के श्लोक की अपनी व्याख्या कर किया दावा, श्लोक के अर्थ को लेकर छिड़ी बहस; मौलाना के खिलाफ एफआईआर पहले से दर्ज, पैरोल पर बाहर होने की चर्चा
एसीएन टाइम्स @ लखनऊ । उत्तर प्रदेश (UttarPradesh) में श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद के बीच इटावा के मौलाना जर्जिस अंसारी (Maulana Jargis Ansari) का विवादित बयान (ReligiousControversy) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में रेप का आरोपी मौलाना यह दावा करते दिखाई दे रहा है कि भगवान श्रीकृष्ण मुस्लिम थे और पांच वक्त की नमाज पढ़ते थे। मौलाना ने अपने इस दावे के समर्थन में श्रीमद्भगवद्गीता (BhagavadGita) के एक श्लोक का हवाला भी दिया। वीडियो वायरल होने के बाद धार्मिक और सामाजिक संगठनों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
अपने भाषण में मौलाना जर्जिस अंसारी ने श्रीमद्भगवद्गीता के छठे अध्याय के 10वें श्लोक "योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः। एकाकी यतचित्तात्मा निराशीरपरिग्रहः॥" का उल्लेख किया है। उसका कहना है कि इस श्लोक का अर्थ है कि ईश्वर की पूजा पूरे शरीर के योग के साथ करनी चाहिए, केवल खड़े होकर पूजा करना पर्याप्त नहीं है। मौलाना ने आगे कहा कि यदि हिंदू (Hindu) समाज अपने धार्मिक ग्रंथों का गहराई से अध्ययन करेगा तो उसे इस्लाम धर्म अच्छा लगने लगेगा।
श्लोक का पारंपरिक अर्थ क्या है?
श्रीमद्भगवद्गीता के प्रचलित भाष्यों के अनुसार इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण (Srikrishna) अर्जुन (arjun) से कहते हैं कि साधक को एकांत स्थान में रहकर, अकेले, मन और इंद्रियों को वश में रखते हुए, बिना इच्छा और संग्रह की भावना के निरंतर ध्यान (योग) में स्थित रहना चाहिए।
महाभारत के युद्धक्षेत्र में अर्जुन मोह और दुविधा से घिर जाते हैं। गीता के पहले पांच अध्यायों में भगवान श्रीकृष्ण उन्हें कर्मयोग, ज्ञानयोग और निष्काम कर्म का उपदेश देते हैं। इसके बाद छठे अध्याय में मन को स्थिर और एकाग्र करने की साधना का विस्तार से वर्णन किया गया है।
इस श्लोक के माध्यम से श्रीकृष्ण अर्जुन को समझाते हैं कि केवल ज्ञान सुन लेना पर्याप्त नहीं है। मन पर नियंत्रण और परमात्मा से जुड़ने के लिए नियमित साधना, अनुशासन और ध्यान आवश्यक है। गीता के पारंपरिक अर्थ के अनुसार यहां 'योग' का आशय ध्यान और आध्यात्मिक साधना से है, न कि किसी विशेष शारीरिक पूजा पद्धति से।
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'अर्थ का कर दिया अनर्थ'
मौलाना के बयान के सामने आने के बाद बवाल मच गया है। लोगों का आरोप है कि मौलाना ने गीता के श्लोक का गलत अर्थ प्रस्तुत किया है। उनका कहना है कि इस श्लोक का मूल विषय ध्यान, आत्मसंयम और मानसिक एकाग्रता है, न कि पूजा की किसी विशेष शारीरिक विधि का निर्देश।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद (Shri Krishna Janmabhoomi Dispute) के बीच वीडियो वायरल होने के बाद विभिन्न हिंदू संगठनों ने मौलाना जर्जिस अंसारी के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की। अंसारी की मां ने इस वीडियो को पुराना बताया है।
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एफआईआर दर्ज, पैरोल पर बाहर है मौलाना
भगवान श्रीकृष्ण को लेकर दिए विवादित बयान के मामले में लखनऊ के हजरतगंज थाने में मौलाना जर्जिस अंसारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। यह मामला हिंदूवादी नेता शिशिर चतुर्वेदी की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 302 और 66 के तहत दर्ज किया गया है।
इसी बीच मौलाना जर्जिस अंसारी के आपराधिक मामलों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, वाराणसी की एक फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 2022 में दुष्कर्म (रेप) के एक मामले में उसे 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। फिलहाल वह पैरोल पर जेल से बाहर है। अंसारी के विरुद्ध इटावा (Etawah), बदायूं (badayun), बरेली (bareli), वाराणसी (varanasi), कानपुर (kanpur) और लखनऊ (Lucknow) समेत कई जिलों में गंभीर धाराओं में दर्जनभर से अधिक मामले दर्ज होने की भी जानकारी सामने आई है।ये भी पढ़ें









