हाईकोर्ट का बड़ा फैसला ! स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव, आयुक्त, संयुक्त संचालक और सीएमएचओ को दो माह की सजा, जानिए- न्यायालय ने किस अपराध में किया दंडित
मप्र हाईकोर्ट ने प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव और आयुक्त सहित 4 आला अफसरों को सजा सुनाई है। सजा 3 सप्ताह बाद प्रभावशील होगी।
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । म.प्र. उच्च न्यायालय की इंदौर खण्डपीठ ने महात्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा ने 9 अवमानना याचिकाओं का निराकरण करते हुए प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य आयुक्त, संयुक्त संचालक और मंदसौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को दो माह की सजा सुनाई है। सभी अधिकारियों को न्यायालय की अवमानना का दोषी ठहराया गया गया है।
एडवोकेट प्रवीण भट्ट ने बताया मंदसौर जिले के स्वास्थ्य विभाग में अशोक कुमार पड़ियार (वार्डबाय) तथा रामस्वरूप पंवार, कैलाश हंस, मुकेश कंडारे, बापूलाल लोट, रामचन्द्र लोट, संजय चनाल, प्रकाशचन्द्र कलोसिया व जगदीश लोट की नियुक्तियां वर्ष 1995 के पूर्व हुई थीं। उन्हें विभाग द्वारा समय पर नियमितिकरण का लाभ नहीं दिया गया। इससे असंतुष्ट हो कर सभी कर्मचारियों द्वारा म.प्र. उच्च न्यायालय के समक्ष अलग-अलग याचिकाएं प्रस्तुत की गईं थी।
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2023 दिसंबर में दिए आदेश का नहीं किया पालन
उक्त याचिकाओं से संबंध में उच्च न्यायालय द्वारा दिसंबर 2023 में महत्वपूर्ण फैसला दिया था। न्यायालय ने 10 वर्ष सेवाकाल पूर्ण होने की दिनांक से सभी कर्मचारियों को नियमित वेतनमान का लाभ देने के आदेश दिए थे। इसका पालन 3 माह में किया जाना था लेकिन विभाग ने उस पर अमल नहीं किया। नतीजतन सभी कर्मचारियों की ओर से 2024 में अलग-अलग अवमानना याचिकाएं प्रस्तुत की गई थीं। मामले में शासन द्वारा 2024 से लगभग 23 बार न्यायालयीन आदेश का पालन करने के लिए समय लिया लेकिन अमल नहीं हुआ। कर्मचारियों को न तो नियमित वेतनमान का स्वीकृत किया न ही भुगतान ही किया।
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प्रमुख सचिव सहित 4 आला अफसरों को माना अवमानना का दोषी
उक्त सभी अवमानना याचिकाओं पर न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा ने सुनाई करते हुए स्वास्थ्य विभाग के रवैये को लेकर कड़ा रुख अपनाया। न्यायालय ने प्रतिवादी स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव सुलेमान खान, स्वास्थ्य आयुक्त तरुण राठी, क्षेत्रिय संयुक्त संचालक डी. के. तिवारी एवं मंदसौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गोविन्द चौहान को अवमानना का दोषी ठहराते हुए 2 माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई। सजा 3 सप्ताह बाद प्रभावशील होगा। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि प्रतिवादियों ने जानबूझ कर न्यायालय के आदेश का पालन करने में देरी की है। मामले में पैरवी एडवोकेट प्रवीणकुमार भट्ट व प्रसन्ना भटनागर ने की।




