MP की सबसे बड़ी साइबर ठगी में भाजपा नेता की गिरफ्तारी के बाद रतलाम का मैकेनिकल इंजीनियर गिरफ्तार, 6 राज्यों तक फैला है 21.05 करोड़ की ठगी का नेटवर्क

मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी 21.05 करोड़ रुपए की साइबर ठगी में भाजपा जिला पंचायत सदस्य जगदीश मालवीय की की गिरफ्तारी के बाद रतलाम का मैकेनिकल इंजीनियर अंकित वर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। म्यूल अकाउंट नेटवर्क छह राज्यों तक फैला था।

MP की सबसे बड़ी साइबर ठगी में भाजपा नेता की गिरफ्तारी के बाद रतलाम का मैकेनिकल इंजीनियर गिरफ्तार, 6 राज्यों तक फैला है 21.05 करोड़ की ठगी का नेटवर्क
मप्र की सबसे बड़ी साइबर ठगी में शाजापुर के भाजपा नेता जगदीश मालवीय के बाद रतलाम का मैकेनिकल इंजीनियर अंकित वर्मा भी गिरफ्तार।

भाजपा के जिला पंचायत सदस्य की गिरफ्तारी के अगले ही दिन खुला नया राज; टेलीग्राम से विदेशी सरगना चला रहे थे पूरा म्यूल अकाउंट नेटवर्क

एसीएन टाइम्स @ ग्वालियर / रतलाम / शाजापुर । मध्यप्रदेश की अब तक की सबसे बड़ी मानी जा रही 21.05 करोड़ रुपए की साइबर ठगी की जांच में राज्य साइबर पुलिस को लगातार बड़ी सफलताएं मिल रही हैं। शाजापुर के भाजपा नेता एवं जिला पंचायत सदस्य जगदीश कुमार मालवीय की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क के अकाउंट हैंडलर अंकित वर्मा को सागर से गिरफ्तार किया है। रतलाम निवासी अंकित पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर है और पुलिस के अनुसार वही ठगी की रकम को विभिन्न म्यूल (Mule) खातों के जरिए देशभर में ट्रांसफर करने का काम संभाल रहा था।

मामला ग्वालियर निवासी 70 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय से जुड़ा है। दिसंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच उन्हें क्रिप्टोकरेंसी में निवेश पर भारी मुनाफे का लालच दिया गया। एक महिला ने उनसे संपर्क कर दोस्ती की और निवेश के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराई। करीब 218 दिनों के दौरान उन्होंने 106 ट्रांजेक्शन के जरिए 21 करोड़ 5 लाख 92 हजार रुपए विभिन्न खातों में भेज दिए। जब उन्होंने निवेश की राशि वापस निकालने का प्रयास किया तो उनसे और पैसा जमा कराने की मांग की गई। इसके बाद उन्हें ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने राज्य साइबर पुलिस के ग्वालियर स्थित नोडल थाने में शिकायत दर्ज कराई।

77 खातों से शुरू होकर 20 हजार से अधिक बैंक खातों तक पहुंचा पैसा

जांच में पुलिस ने पाया कि फरियादी द्वारा भेजी गई रकम सबसे पहले 77 बैंक खातों में पहुंची। इसके बाद लगभग 15 अलग-अलग ट्रांजेक्शन लेयर्स से गुजरते हुए यह पैसा देशभर के 20 हजार से अधिक बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। राज्य साइबर पुलिस के अनुसार यह अब तक सामने आए सबसे जटिल बैंक ट्रेल में से एक है, जिसमें रकम को लगातार अलग-अलग खातों में भेजकर उसका स्रोत छिपाने का प्रयास किया गया।

ये भी पढ़ें

पहले गिरफ्तार हुआ भाजपा का जिला पंचायत सदस्य

इस बैंक ट्रेल की जांच के दौरान पुलिस शाजापुर के जिला पंचायत सदस्य एवं भाजपा नेता जगदीश कुमार मालवीय तक पहुंची। जांच में पता चला कि ठगी की रकम में से 50 लाख रुपए पहली लेयर में ही उसके बैंक खाते में ट्रांसफर हुए थे। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया और रिमांड पर लिया। उसके खाते की जांच में करीब ढाई करोड़ रुपए का संदिग्ध लेनदेन भी सामने आया।

पूछताछ में जगदीश मालवीय ने स्वीकार किया कि उसने "सर्व कल्याण अनुसूचित जाति एवं जनजाति" नामक संस्था का बैंक खाता उपलब्ध कराया था। इसके बदले उसे घर बैठे लगभग दो प्रतिशत कमीशन मिलता था। जांच में यह भी सामने आया कि उसका यही बैंक खाता देश के छह राज्यों में हुई साइबर ठगी की वारदातों में इस्तेमाल किया गया। उसने पुलिस को यह भी बताया कि अलग-अलग राज्यों में हुई 11 साइबर ठगी की घटनाओं की रकम भी उसके खाते में आ चुकी है।

जगदीश के खुलासे के बाद रतलाम का इंजीनियर गिरफ्तार

जगदीश मालवीय से पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि बैंक खाते का वास्तविक संचालन रतलाम के इंद्रानगर निवासी अंकित वर्मा कर रहा था। इसके बाद डीएसपी संजीव नयन शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम ने उसकी तलाश शुरू की।

पुलिस को पहले जानकारी मिली कि वह बिहार के पटना से नेटवर्क संचालित कर रहा है। बाद में उसकी लोकेशन सागर में मिली, जहां से उसे गिरफ्तार कर लिया गया। अंकित के मोबाइल और लैपटॉप से ऐसे डिजिटल रिकॉर्ड मिले हैं, जिनसे मध्यप्रदेश सहित उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में संचालित म्यूल खातों के नेटवर्क के अहम सुराग मिले हैं।

ये भी पढ़ें

मैकेनिकल इंजीनियर निकला पूरे अकाउंट नेटवर्क का संचालक

पुलिस के अनुसार अंकित वर्मा पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर है और उसका अपना वर्कशॉप भी है। पिछले करीब डेढ़ वर्ष से वह साइबर ठगों के लिए म्यूल खातों की हैंडलिंग कर रहा था। तकनीकी जानकारी अच्छी होने के कारण वह टेलीग्राम के जरिए विदेश में बैठे सरगनाओं के संपर्क में आया और उसे बैंक खातों के संचालन की जिम्मेदारी दी गई।

जैसे ही किसी खाते में ठगी की रकम पहुंचती थी, वह तुरंत उसे दूसरे राज्यों के म्यूल खातों में ट्रांसफर कर देता था। खाताधारकों को उनका कमीशन भेजने के बाद बाकी रकम आगे भेज दी जाती थी, जिससे जांच एजेंसियों के लिए वास्तविक ट्रेल पकड़ना मुश्किल हो जाता था।

APK फाइल से ले लेता था बैंक खातों का पूरा नियंत्रण

जांच में सामने आया कि पूरा नेटवर्क एपीके (APK) फाइल के जरिए संचालित किया जा रहा था। पुलिस के अनुसार खाताधारकों से विशेष एपीके फाइल डाउनलोड कराई जाती थी, जिसके बाद बैंक खाते और मोबाइल का पूरा एक्सेस आरोपी के पास पहुंच जाता था। ओटीपी भी उसके नियंत्रण में रहते थे। इससे बैंक खाते किसी दूसरे राज्य के व्यक्ति के नाम पर होते हुए भी उनका संचालन कहीं और से किया जाता था, जिससे जांच एजेंसियां भ्रमित होती थीं।

ये भी पढ़ें

अब तक 3.5 करोड़ रुपए होल्ड, 85 लाख की रिफंड प्रक्रिया शुरू

राज्य साइबर पुलिस ने इस मामले में अब तक करीब 3.5 करोड़ रुपए होल्ड करा दिए हैं। वहीं, लगभग 85 लाख रुपए पीड़ित को वापस दिलाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। जांच में यह भी सामने आया है कि ठगी की बड़ी राशि दक्षिण भारत के विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर की गई, जिसकी पड़ताल अभी जारी है।

आगे और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना

राज्य साइबर पुलिस के डीएसपी संजीव नयन शर्मा ने बताया कि सागर से गिरफ्तार आरोपी एपीके फाइल के जरिए बैंक खातों का संचालन करता था। यही खाते देश के छह राज्यों में हुई साइबर ठगी की अन्य वारदातों में भी इस्तेमाल हुए हैं। दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और जांच के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।

ये भी पढ़ें