सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव टालने की उठी मांग, जानिए- किसने उठाई यह मांग और क्या दिया तर्क
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव की मतदान तिथि 18 अगस्त से बदलने की मांग उठ रही है। इसे 25 सितंंबर करने का आग्रह किया गया है। यह मांग किसने और क्यों की, यह जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर।
एसीएन टाइम्स @ नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के चुनाव कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. आदीश सी. अग्रवाल ने मतदान की तारीख बदलने की मांग की है। उन्होंने निर्वाचन समिति से आग्रह किया है कि 18 अगस्त 2026 के बजाय 25 सितम्बर 2026 को मतदान कराने की अनुमति के लिए सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष मामला रखा जाए। डॉ. अग्रवाल का कहना है कि वर्तमान कार्यक्रम में मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने, आपत्तियों के निस्तारण, उम्मीदवारों को प्रचार का पर्याप्त अवसर देने और सदस्यों की प्रभावी भागीदारी के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध नहीं है।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. अग्रवाल ने निर्वाचन समिति के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता तथा समिति के अन्य सदस्यों को विस्तृत प्रतिवेदन भेजा है। इसमें उन्होंने कहा है कि निर्वाचन समिति द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 27 जुलाई को अंतरिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी और उस पर आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि 30 जुलाई निर्धारित की गई है। एससीबीए के मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है। ऐसे में सदस्यों को मतदाता सूची का परीक्षण करने, आवश्यक दस्तावेज जुटाने और आपत्तियां प्रस्तुत करने के लिए केवल चार दिन देना पूरी तरह अपर्याप्त है।
उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2023 के एससीबीए चुनाव, जिनमें निर्वाचन समिति की अध्यक्षता भी जयदीप गुप्ता ही कर रहे थे, उस समय अंतरिम मतदाता सूची 15 अप्रैल 2023 को प्रकाशित हुई थी और उस पर 24 अप्रैल 2023 तक आपत्तियां आमंत्रित की गई थीं। यानी उस समय सदस्यों को 10 दिन का समय दिया गया था।
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आपत्तियों के निस्तारण के लिए भी कम समय निर्धारित
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि मौजूदा चुनाव कार्यक्रम में प्राप्त आपत्तियों पर निर्णय लेने के लिए केवल दो दिन का समय निर्धारित किया गया है, जबकि 2023 के चुनाव में इसी कार्य के लिए चार दिन दिए गए थे।
उन्होंने आशंका जताई कि इतने कम समय में वास्तविक और उचित आपत्तियों का समुचित परीक्षण और निष्पक्ष निर्णय संभव नहीं होगा। इससे अंतिम मतदाता सूची की शुद्धता और उसकी कानूनी वैधता भी प्रभावित हो सकती है।
उम्मीदवारों को प्रचार के लिए पर्याप्त अवसर नहीं मिलेगा
डॉ. अग्रवाल का कहना है कि, प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 4 अगस्त को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी और 18 अगस्त को मतदान कराया जाएगा। नामांकन प्रक्रिया और उससे जुड़ी अन्य औपचारिकताओं के बाद उम्मीदवारों को मतदाताओं से संपर्क स्थापित करने और चुनाव प्रचार के लिए केवल लगभग 10 दिन ही मिल पाएंगे, जबकि 2023 के चुनाव में उम्मीदवारों को लगभग 16 दिन का समय मिला था।
उन्होंने बताया कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की अंतिम सूची 11 अगस्त को प्रकाशित होनी है। इसके बाद मतदान 18 अगस्त को होगा। यानी उम्मीदवारों को प्रभावी चुनाव प्रचार के लिए केवल छह स्पष्ट दिन ही मिलेंगे। इसके विपरीत, 2023 के चुनाव में उम्मीदवारों को लगभग 10 दिन प्रचार के लिए उपलब्ध थे।
15 जुलाई की सुनवाई में 25 सितंबर का विकल्प रखा गया था
डॉ. अग्रवाल ने अपने प्रतिवेदन में कहा कि 15 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान निर्वाचन समिति के अध्यक्ष श्री जयदीप गुप्ता ने स्वयं माननीय सर्वोच्च न्यायालय को बताया था कि चुनाव शुक्रवार, 25 सिंतबर 2026 को उचित रूप से कराए जा सकते हैं। इसके बावजूद बाद में मतदान की तिथि बदलकर मंगलवार, 18 अगस्त निर्धारित कर दी गई।
शुक्रवार को मतदान कराना अधिक व्यावहारिक
उन्होंने कहा कि मंगलवार का दिन सर्वोच्च न्यायालय में नियमित रूप से वकालत करने वाले अधिवक्ताओं के लिए मतदान की दृष्टि से सुविधाजनक नहीं होगा। एससीबीए में परंपरागत रूप से मतदान शुक्रवार को कराया जाता रहा है। शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय में विविध मामलों की सुनवाई होती है, जिससे बार के सदस्यों की उपस्थिति नियमित सुनवाई वाले दिनों की तुलना में अधिक रहती है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि मतदान शुक्रवार को कराया जाता है तो मतगणना शनिवार और रविवार को सप्ताहांत के दौरान आराम से कराई जा सकती है। इससे न्यायालय अथवा एसोसिएशन के नियमित कामकाज में भी कोई व्यवधान नहीं आएगा।
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निवर्तमान पदाधिकारियों के कार्यकाल को लेकर भी उठाया मुद्दा
15 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय में हुई कार्यवाही का उल्लेख करते हुए डॉ. अग्रवाल ने कहा कि न्यायालय कक्ष में उपस्थित अनेक अधिवक्ताओं ने 25 सितंबर को मतदान कराने के प्रस्ताव का विरोध किया था। उन्होंने बताया कि विरोध का मुख्य कारण यह था कि निवर्तमान पदाधिकारियों का कार्यकाल 19 मई को समाप्त हो चुका है, लेकिन वे अभी भी अपने पदों पर बने हुए हैं।
दैनिक प्रशासन निर्वाचन समिति को सौंपने का सुझाव
डॉ. अग्रवाल ने इस समस्या के समाधान के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था भी सुझाई है। उन्होंने कहा कि नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के पदभार ग्रहण करने तक सर्वोच्च न्यायालय एससीबीए के दैनिक प्रशासन और नियमित कार्यों की जिम्मेदारी निर्वाचन समिति को सौंप सकता है।
उनके अनुसार इससे एक ओर निवर्तमान पदाधिकारी कार्यकाल समाप्त होने के बाद पद पर बने नहीं रहेंगे और दूसरी ओर स्वतंत्र, निष्पक्ष तथा कानूनी रूप से वैध चुनाव कराने के लिए पर्याप्त समय भी उपलब्ध हो जाएगा।
15 जुलाई के आदेश का हवाला देते हुए मामला मेंशन करने का आग्रह
डॉ. अग्रवाल ने निर्वाचन समिति से अनुरोध किया कि वह सर्वोच्च न्यायालय के 15 जुलाई के आदेश में दिए गए उस निर्देश का उपयोग करे, जिसमें कहा गया है कि "निर्वाचन समिति को मामले का उल्लेख (मेंशन) करने की स्वतंत्रता सुरक्षित रखी जाती है।"
उन्होंने कहा कि इस आदेश के आधार पर निर्वाचन समिति किसी अलग औपचारिक आवेदन के बिना भी सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष मामला रख सकती है और चुनाव कार्यक्रम से जुड़ी सभी व्यावहारिक कठिनाइयों तथा प्रासंगिक तथ्यों को न्यायालय के सामने प्रस्तुत कर सकती है।
पर्याप्त समय नहीं मिला तो चुनाव में भाग लेना होगा कठिन
डॉ. अग्रवाल ने चेतावनी दी कि यदि अंतरिम मतदाता सूची की जांच एवं सुधार, आपत्तियों की प्रस्तुति और उनके समुचित निस्तारण, विधिवत नामांकित उम्मीदवारों के चुनाव प्रचार तथा मतदान प्रक्रिया में सदस्यों की प्रभावी भागीदारी के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध नहीं कराया गया तो उनके लिए ऐसे चुनाव में भाग लेना अत्यंत कठिन होगा।
उन्होंने कहा, "पिछले चुनाव को प्रभावित करने वाली कमियों को दोहराया नहीं जाना चाहिए। चुनाव प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे एसोसिएशन के सभी सदस्यों में विश्वास उत्पन्न हो तथा मतदाता सूची की शुद्धता या चुनाव कार्यक्रम की निष्पक्षता के संबंध में किसी भी प्रकार की वैध आशंका के लिए कोई स्थान न रहे।"
28 जुलाई से राजघाट पर शांतिपूर्ण उपवास की घोषणा
डॉ. अग्रवाल ने घोषणा की कि यदि उनकी इस वैध और लोकतांत्रिक मांग पर ध्यान नहीं दिया गया तो वह सक्षम अधिकारियों से आवश्यक अनुमति प्राप्त करने के बाद मंगलवार, 28 जुलाई से नई दिल्ली स्थित राजघाट पर शांतिपूर्ण उपवास शुरू करेंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह बी. डी. कौशिक मामले में कोई अंतरिम आवेदन दाखिल नहीं करना चाहते, क्योंकि नया आवेदन दाखिल करने और उसकी सुनवाई सूचीबद्ध होने में बहुमूल्य समय व्यर्थ हो सकता है। इसके विपरीत निर्वाचन समिति को 15 जुलाई के आदेश के तहत सीधे सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष मामला रखने की स्वतंत्रता पहले से प्राप्त है।
डॉ. अग्रवाल ने आशा व्यक्त की कि निर्वाचन समिति उनके प्रतिवेदन पर तत्काल और गंभीरतापूर्वक विचार करेगी तथा संस्था, बार के सदस्यों और चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता के व्यापक हित में इस विषय को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
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