सराफा व्यापारी गोलीकांड के आरोपी आदित्य सोमानी की जमानत याचिका खारिज, अदालत बोली- साजिश रचने के लिए घटनास्थल पर मौजूद होना जरूरी नहीं

रतलाम के चर्चित गोलीबारी एवं आपराधिक षड्यंत्र मामले में द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने आरोपी आदित्य सोमानी की पहली नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि आपराधिक साजिश के मामलों में घटनास्थल पर मौजूद होना अनिवार्य नहीं है।

सराफा व्यापारी गोलीकांड के आरोपी आदित्य सोमानी की जमानत याचिका खारिज, अदालत बोली- साजिश रचने के लिए घटनास्थल पर मौजूद होना जरूरी नहीं
सराफा व्यापारी कमल सोनी के घर पर गोली चलवाने के आरोपी आदित्य सोनी की जमानत याचिका खारिज।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । बहुचर्चित गोलीकांड एवं आपराधिक षड्यंत्र मामले में द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव की अदालत ने आरोपी आदित्य सोमानी की प्रथम नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आपराधिक षड्यंत्र (क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी) की स्थिति में आरोपी का घटनास्थल पर मौजूद होना आवश्यक नहीं है। केवल घटना के समय जेल में निरुद्ध होने के आधार पर उसकी संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता।

अभियोजन के अनुसार घटना 19 जून 2026 को दोपहर करीब दोपहर 3.16 बजे थाना दीनदयाल नगर क्षेत्र में हुई थी। फरियादी कमल के घर के बाहर मोटरसाइकिल पर सवार मुंह बांधे दो अज्ञात युवक पहुंचे। उस समय फरियादी की पत्नी मनीषा सोनी ने खिड़की से बाहर देखा तो एक आरोपी ने जान से मारने की नीयत से उस पर पिस्टल से गोली चला दी। महिला समय रहते झुक गई, जिससे गोली खिड़की का कांच तोड़ते हुए निकल गई और वह बाल-बाल बच गई। घटना के बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109(1) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

ये भी पढ़ें

40 लाख में सुपारी लेने का मामला

विवेचना के दौरान 20 जून 2026 को फरियादी द्वारा उपलब्ध कराए गए सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने सह-आरोपी विनीत उर्फ चुचु, भोला उर्फ मोनू, कन्हैयालाल उर्फ कान्हा, सिराज तथा अर्जुन को गिरफ्तार किया। पूछताछ एवं मेमोरेंडम बयानों में आरोपियों ने खुलासा किया कि फरियादी कमल और आरोपी आदित्य पिता राजेश सोमानी निवासी सदर बाजार, बड़ी सरवन (रतलाम) के बीच करीब एक करोड़ रुपए के लेनदेन को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप है कि उक्त राशि निकलवाने के लिए 40 प्रतिशत कमीशन तय कर सह-आरोपी गोलू बाबा उर्फ योगेंद्र और वीनू शर्मा के साथ मिलकर फरियादी के परिवार पर गोलीबारी कराने की साजिश रची गई थी।

जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने मामले में बीएनएस की धारा 61(2) तथा आयुध अधिनियम की धारा 25 और 27 भी जोड़ दीं। इसके बाद 26 जून 2026 को आरोपी आदित्य सोमानी को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

ये भी पढ़ें

बचाव पक्ष ने रखा यह पक्ष

आरोपी की ओर से अधिवक्ता ने अदालत में तर्क दिया कि फरियादी के बेटे की शिकायत पर सरवन थाने में दर्ज एक अन्य मामले में आदित्य सोमानी 18 जून 2026 से ही न्यायिक अभिरक्षा में था। ऐसे में 19 जून को हुई गोलीबारी की घटना में उसकी प्रत्यक्ष या परोक्ष संलिप्तता संभव नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि पैसों के लेनदेन के विवाद से बचने के उद्देश्य से आरोपी के खिलाफ झूठा प्रकरण दर्ज कराया गया है।

शासन ने किया जमानत का विरोध

शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक विवेक उपाध्याय ने जमानत आवेदन का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी पर गंभीर प्रकृति के अपराध के आरोप हैं। यदि उसे जमानत दी जाती है तो वह गवाहों को प्रभावित करने, डराने-धमकाने तथा साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने का प्रयास कर सकता है।

ये भी पढ़ें

अदालत की अहम टिप्पणी

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने बचाव पक्ष के तर्कों को स्वीकार नहीं किया। न्यायालय ने कहा कि आरोपी पर आपराधिक षड्यंत्र रचने का आरोप है और षड्यंत्र घटना से पहले तैयार किया जाता है। ऐसे मामलों में आरोपी का घटनास्थल पर व्यक्तिगत रूप से मौजूद होना आवश्यक नहीं होता। केवल घटना के समय जेल में निरुद्ध होने के आधार पर उसकी भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।

अदालत ने मामले की गंभीरता, करोड़ों रुपए के लेनदेन से जुड़े विवाद तथा अपराध की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए आरोपी आदित्य सोमानी की प्रथम नियमित जमानत याचिका निरस्त कर दी।

ये भी पढ़ें