Global मंच पर SYSITS ! रतलाम के व्याख्याताओं ने इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में बढ़ाया गौरव, ICLASM 2026 में देश-विदेश के विशेषज्ञों के साथ प्रस्तुत किए शोध पत्र

SYSITS रतलाम के व्याख्याताओं ने ICLASM 2026 इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में भाग लेकर शोध पत्र प्रस्तुत किए और शहर का गौरव बढ़ाया।

Global मंच पर SYSITS ! रतलाम के व्याख्याताओं ने इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में बढ़ाया गौरव, ICLASM 2026 में देश-विदेश के विशेषज्ञों के साथ प्रस्तुत किए शोध पत्र
sysits के व्याख्याता हाईब्रिड इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में अपने विचार व्यक्त करते हुए।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । रतलाम के श्री योगीन्द्र सागर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (SYSITS) के प्रबंधन संकाय के पांच व्याख्याताओं ने प्रूडेंस इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस 2026 (ICLASM 2026) में भाग लेकर शहर का गौरव बढ़ाया। उन्होंने  अपने शोध पत्र प्रस्तुत करते हुए वैश्विक मंच पर संस्थान का प्रतिनिधित्व किया। कॉन्फ्रेंस क्वांटम यूनिवर्सिटी, रुड़की (उत्तराखंड) द्वारा हाइब्रिड मोड में आयोजित की गई थी। इसमें देश-विदेश के शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

कॉन्फ्रेंस में श्री योगीन्द्र सागर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (SYSITS) की ओर से प्रबंधन विभाग प्रभारी रश्मि चौहान, शैलेश शाह, मनीषा राठौर, अंशिता शर्मा और प्रियंका पाठक ने भाग लिया। उन्होंने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इस दौरान व्याख्याताओं को अपने विचार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रखने का अवसर मिला, जो उनके लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक अनुभव रहा।

इन वक्ताओं ने भी व्यक्त किए विचार

सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय स्तर के वक्ताओं ने भी अपने विचार साझा किए। इनमें ऑस्ट्रेलिया के एनालिटिक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मेलबर्न से एसोसिएट डीन डॉ. माइकल बारोन, मलेशिया की ग्लोबल नेक्स्ट यूनिवर्सिटी से डॉ. मुथमाइनाह, मेलबर्न की ग्लोबल अपॉर्चुनिटीज कमर्शियलाइजेशन प्राइवेट लिमिटेड के CEO डॉ. क्रिस सोतिरोपुलस और फिजी नेशनल यूनिवर्सिटी के डॉ. सुरेश कुमार पांडे शामिल रहे।

प्रबंधन का आभार व्यक्त किया

कॉन्फ्रेंस में भागीदारी के लिए महाविद्यालय के निदेशक लोकेन्द्र विक्रम सिंह ने शिक्षकों का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम के बाद प्रबंधन संकाय के व्याख्याताओं ने वाइस चेयरमैन वरदान शर्मा और उमेश शर्मा के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी जारी रखी जाएगी, जिससे शिक्षकों का निरंतर ज्ञानवर्धन होता रहे।