मिलिए रतलाम के नए कलेक्टर अजय कटेसरिया से; तकनीक आधारित प्रशासन के समर्थक, लेकिन 40 एकड़ जमीन निजी लोगों के नाम करने को लेकर भी रहे चर्चा में

रतलाम के नए कलेक्टर का नाम अजय कटेसरिया है लेकिन वे कैसे हैं, उनकी कार्यप्रणाली क्या है, यह जानने के लिए आपको यह खबर पढ़नी पड़ेगी।

मिलिए रतलाम के नए कलेक्टर अजय कटेसरिया से; तकनीक आधारित प्रशासन के समर्थक, लेकिन 40 एकड़ जमीन निजी लोगों के नाम करने को लेकर भी रहे चर्चा में
ऐसे रतलाम के नए कलेक्टर अजय कटेसरिया।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम। अब रतलाम जिले के कलेक्टर 2012 बैच के IAS अजय कटेसरिया होंगे। उनकी पहचान तकनीक आधारित सुशासन, पारदर्शी कार्यप्रणाली और प्रशासनिक अनुशासन को लेकर रही है। सतना और शाजापुर में कलेक्टर के रूप में वे जनसुनवाई, राजस्व प्रबंधन और प्रशासनिक सुधारों को लेकर चर्चा में रहे। भोपाल में सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) और मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड (ESB) में संस्थागत सुधारों पर भी काम किया। प्रशासनिक सफर के दौरान उन पर सतना में 40 एकड़ सरकारी भूमि निजी लोगों के नाम करने के आरोप भी लग चुके हैं।

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मध्य प्रदेश शासन द्वारा शुक्रवार देर रात जारी आदेश के तहत रतलाम में पदस्थ IAS मिशा सिंह का तबादला शहडोल कर दिया गया है। उनके स्थान पर 2012 बैच (रेगुलर रिक्रूट) के IAS अधिकारी अजय कटेसरिया को नया कलेक्टर नियुक्त किया गया है। 11 अगस्त 1981 को जन्मे अजय कटेसरिया मूलतः झारखंड के निवासी हैं। कॉमर्स विषय से स्नातक (B.Com) करने के बाद उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया। 3 सितंबर 2012 को IAS के रूप में नियुक्ति के बाद से उन्होंने मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों और महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारियां निभाईं। वित्तीय अनुशासन, प्रशासनिक दक्षता और निर्णय लेने की क्षमता उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषताएं मानी जाती हैं।

हालिया तबादले से पहले वे सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) में अतिरिक्त सचिव के पद पर कार्यरत थे। इसके साथ ही उनके पास मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड (ESB) के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी था। इन दोनों महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के माध्यम से वे राज्य के प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में कार्य कर रहे थे।

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जनता के बीच 'पीपुल्स कलेक्टर' की बनी पहचान

अजय कटेसरिया को उनके कलेक्टर कार्यकाल के दौरान आम नागरिकों से सीधे संवाद स्थापित करने वाले अधिकारी के रूप में जाना जाता है। प्रशासनिक हलकों में उनकी पहचान ऐसे अधिकारी के रूप में रही है, जिन्होंने जहां भी जिम्मेदारी संभाली, वहां पारदर्शिता, प्रक्रियागत सुधार, तकनीक आधारित प्रशासन और जनसुनवाई को प्राथमिकता दी। सतना और शाजापुर में उन्होंने जनसुनवाई व्यवस्था को मजबूत करने, लंबित शिकायतों के निराकरण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर विशेष जोर दिया।

विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं पर फोकस

सतना कलेक्टर रहते उन्होंने भूमि राजस्व संबंधी मामलों को व्यवस्थित करने, प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने तथा विभिन्न विकास परियोजनाओं को गति देने का प्रयास किया। लंबे समय से लंबित जन-शिकायतों के त्वरित निराकरण पर उनका विशेष फोकस रहा, जिससे उन्हें आम लोगों के बीच एक सक्रिय और संवेदनशील प्रशासक के रूप में पहचान मिली।

शाजापुर में कलेक्टर रहते उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए कई प्रशासनिक पहल कीं। विशेष रूप से कमजोर वर्गों तक सरकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने पर उनका जोर रहा।

कर्मचारी चयन बोर्ड में तकनीक और पारदर्शिता पर जोर

मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड (ESB) के निदेशक के रूप में अजय कटेसरिया को राज्य की सबसे संवेदनशील जिम्मेदारियों में से एक सौंपी गई। ESB में उनके कार्यकाल को ऐसे दौर के रूप में देखा जाता है, जिसमें तकनीकी निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही को अधिक महत्व मिला। उनके नेतृत्व में भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठाए गए। इनमें प्रमुख रूप से ये उपाय शामिल हैं-

  • परीक्षा प्रणाली में आधुनिक डिजिटल सुरक्षा उपायों का समावेश।
  • भर्ती कैलेंडर का समयबद्ध पालन सुनिश्चित करने पर विशेष बल।
  • परीक्षार्थियों के साथ संवाद की व्यवस्था को मजबूत करना।
  • भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वास बहाल करने की दिशा में संस्थागत सुधार।

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योग्यता आधारित कार्य संस्कृति को किया मजबूत

18 दिसंबर 2024 से सामान्य प्रशासन विभाग में अतिरिक्त सचिव के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने राज्य शासन की मानव संसाधन नीति, प्रशासनिक प्रबंधन तथा विभिन्न सेवा संबंधी मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। GAD को शासन की रीढ़ माना जाता है और इस विभाग में उनकी जिम्मेदारी प्रशासनिक दक्षता, जवाबदेही और योग्यता आधारित कार्य संस्कृति को मजबूत करने की रही।

तकनीक आधारित सुशासन के समर्थक

अजय कटेसरिया उन अधिकारियों में गिने जाते हैं जो प्रशासन में तकनीक के अधिकतम उपयोग के पक्षधर रहे हैं। उनकी कार्यशैली में ई-गवर्नेंस, डिजिटल प्रक्रियाएं, संस्थागत सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही प्रमुख तत्व रहे हैं। उनका मानना रहा है कि बेहतर तकनीकी व्यवस्था के माध्यम से प्रशासन को अधिक प्रभावी और नागरिकों के प्रति उत्तरदायी बनाया जा सकता है।

सरकारी जमीनों के हेर-फेर के लग चुके आरोप

IAS कटेसरिया के प्रशासनिक कार्यकाल के साथ एक विवाद भी जुड़ा रहा, जिसकी विभागीय जांच राज्य शासन स्तर पर हुई। उन पर आरोप लगा था कि फरवरी 2020 से दिसंबर 2021 के बीच सतना कलेक्टर रहते हुए उन्होंने शासकीय एवं नजूल की लगभग 40 एकड़ भूमि निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कराने संबंधी आदेश पारित किए थे। कुछ मामलों में अभिलेखों से "शासकीय" शब्द हटाने का आरोप भी लगा था।

मामले की जांच रीवा संभाग के तत्कालीन आयुक्त अनिल सुचारी ने की थी। उनके जांच प्रतिवेदन के आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग ने अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के तहत कटेसरिया को आरोप-पत्र (चार्जशीट) जारी कर जवाब मांगा था। कटेसरिया को हटाकर अनुराग वर्मा को सतना का कलेक्टर बनाया गया था। 

दोबारा खुली फाइल, स्पष्टीकरण दिया और हो गए बरी

इस मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब कटेसारिया ने आरोप-पत्र का जवाब प्रस्तुत किया। अपने जवाब में उन्होंने कहा कि भूमि को निजी घोषित करने की प्रक्रिया वरिष्ठ न्यायालयों के आदेशों पर आधारित थी, जिसका उन्होंने पालन किया। उनके आदेश केवल तकनीकी त्रुटियों को दूर करने के लिए थे। कटेसरिया ने तत्कालीन रीवा कमिश्नर द्वारा भेजी गई चार्जशीट को "दुर्भावनापूर्ण" और तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत करने वाली बताया।

अतः GAD ने नियमानुसार पुनः रीवा संभागायुक्त से राय मांगी। इस बार राय कटेसरिया के पक्ष में आई और उनके स्पष्टीकरण को सही बताया गया। नई रिपोर्ट आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग ने 7 नवंबर, 2025 को अंतिम आदेश जारी किया जिसमें अजय कटेसारिया को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। बता दें कि, जब कटेसरिया को दोषी बताया गया था तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान थे और जब आरोपों से बरी किया गया तब तक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बन चुके थे।

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