PM आवास योजना सवाल ! नगर निगम द्वारा तीसरी बार विज्ञप्ति जारी करने पर पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने उठाए सवाल, बोले- MIG फ्लैट किराए पर दे सकते हैं तो EWS गरीबों को क्यों नहीं?

पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मुखर्जी नगर के एमआईजी फ्लैटों को किराए पर देने के लिए तीसरी बार विज्ञप्ति जारी होने पर सवाल उठाए।

PM आवास योजना  सवाल ! नगर निगम द्वारा तीसरी बार विज्ञप्ति जारी करने पर पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने उठाए सवाल, बोले- MIG फ्लैट किराए पर दे सकते हैं तो EWS गरीबों को क्यों नहीं?
रतलाम के मुखर्जी नगर स्थित पीएम आवास के एमआईजी फ्लैट किराए पर देने की प्रक्रिया को लेकर पूर्व विधायक परस सकलेचा ने सवाल उठाए हैं।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम। नगर निगम ने प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के एएचपी घटक के अंतर्गत मुखर्जी नगर में निर्मित एमआईजी फ्लैट किराए पर देने के लिए तीसरी बार विज्ञप्ति जारी की है। इस पर पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि यदि इन फ्लैटों को एकमुश्त राशि में लेने के बजाय किराए पर देने का विकल्प उपलब्ध कराया जा सकता है, तो इसी योजना के अंतर्गत डोसीगांव में निर्मित ईडब्ल्यूएस फ्लैट गरीब हितग्राहियों के लिए किराए का विकल्प क्यों नहीं दिया गया?

कांग्रेस नेता सकलेचा ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अपने घर की उम्मीद लगाए बैठे परिवारों की आर्थिक स्थिति को समझना आवश्यक था। जो परिवार दो वर्ष में ₹20,000 तक जमा नहीं कर पाए और अंततः उन्हें ₹10,000 की सहायता विधायक द्वारा उपलब्ध करानी पड़ी, उनसे अचानक ₹1.80 लाख एकमुश्त जमा करने की अपेक्षा करना कितना व्यावहारिक और मानवीय है। इस पर विचार किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि नगर निगम गरीब हितग्राहियों को बैंक ऋण उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं थी, तो कम से कम किस्तों में भुगतान अथवा किराए पर आवास उपलब्ध कराने का विकल्प रखा जा सकता था। उनके अनुसार, इससे ऐसे परिवारों को आवास का लाभ मिलने की संभावना बनी रहती और योजना का मूल उद्देश्य भी पूरा होता।

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20 प्रतिशत ने राशि जमा की तो 80 प्रतिशत की आर्थिक वास्तविकता खत्म नहीं हो जाती

सकलेचा ने सवाल उठाया कि क्या 20 प्रतिशत हितग्राहियों द्वारा राशि जमा कर देने से शेष 80 प्रतिशत गरीब परिवारों की आर्थिक वास्तविकता समाप्त हो जाती है? क्या कुछ लोगों द्वारा भुगतान कर दिए जाने के आधार पर बाकी परिवारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का औचित्य स्वतः सिद्ध हो जाता है?

उन्होंने कहा कि महापौर को गरीब परिवारों की परिस्थितियों को केवल वसूली के दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए, बल्कि प्रधानमंत्री आवास योजना के मूल उद्देश्य के संदर्भ में देखना चाहिए। योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है और इसी भावना के अनुरूप समाधान तलाशे जाने चाहिए।

यह लड़ाई गरीबों के सम्मान और अधिकार की भी’

पूर्व विधायक ने कहा कि यह लड़ाई केवल गरीब परिवारों के मकानों की नहीं है, बल्कि गरीबों के सम्मान, उनके अधिकार और शासन की जवाबदेही की भी लड़ाई है। उन्होंने कहा कि जब गरीब परिवार आर्थिक कठिनाइयों के कारण निर्धारित राशि जमा नहीं कर पा रहे थे, तब उनके सामने व्यवहारिक और मानवीय विकल्प रखे जाने चाहिए थे।

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पारस सकलेचा के महापौर से सीधे सवाल

जब एमआईजी फ्लैट किराए पर दिए जा सकते हैं, तो गरीबों के ईडब्ल्यूएस फ्लैट किराए पर क्यों नहीं दिए जा सकते?”

जब ₹20,000 जुटाना गरीब परिवारों के लिए कठिन था, तो ₹1.80 लाख एकमुश्त जमा करने की अपेक्षा किस आधार पर की गई?”

जब समाधान के कई मानवीय रास्ते संभव थे, तो गरीब परिवारों को बेघर करने की नौबत क्यों आई?”

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