रोशनी का महादान ! आंखें बंद हुईं, लेकिन दो लोगों की दुनिया रोशन कर गईं सुषमा खोंड, परिजन ने शोक को सेवा में बदला
रतलाम की स्वर्गीय सुषमा खोंड के निधन के बाद परिजन ने नेत्रदान कर दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में रोशनी लाने का मार्ग प्रशस्त किया। काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन, नेत्रम् संस्था और गीता भवन न्यास ने परिवार का सम्मान किया।
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । जीवन की अंतिम यात्रा के बाद भी किसी के जीवन में उजाला किया जा सकता है, इसका प्रेरणादायी उदाहरण शहर के खोंड परिवार ने पेश किया। 85 वर्षीय सुषमा खोंड का निधन हुआ तो परिजन ने नेत्रदान का निर्णय लेकर मानवता का परिचय दिया। दिगवंत खोंड की आंखें भले ही बंद हुईं लेकिन वे अंतिम विदाई से पहले दो दृष्टिहीन व्यक्तियों के जीवन को रोशन करने का जरिया बन गईं।
शहर के छत्रीपुल क्षेत्र स्थित प्रिंस प्लाजा में रहने वाली 85 वर्षीय सुषमा पति स्व. हरनिथा खोंड का गत दिवस निधन हो गया। उनके निधन के उपरांत परिजन ने उनके नेत्रदान कराने का निर्णय लिया। इस पुनीत कार्य की प्रेरणा ध्रुवकुमार पारखी, रश्मि माधवी पारखी एवं उनके परिवार ने दी। समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और मानव सेवा के लिए उनके सतत प्रयासों ने परिजन को यह महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया।
इस प्रेरणादायी निर्णय में परिवार के सभी सदस्यों ने सहमति प्रदान की। इनमें पुत्र दिलीप, पुत्रवधु अलका मेंढे, शोभा खोंड (मेंढे), अलका मेंढे (खोंड), पौत्र मोहित, अभिषेक, पीयूष, पुत्रियां अनीता देव एवं छाया अवस्थी सहित समस्त परिवारजन शामिल रहे।
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सूचना मिलते ही सक्रिय हुई संस्थाएं
निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर स्वर्गीय सुषमा खोंड के निधन की सूचना परिजन ने काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन के सचिव गोविंद काकानी को दी। सूचना प्राप्त होते ही काकानी ने तत्काल गीता भवन न्यास, बड़नगर के डॉ. जी. एल. ददरवाल तथा नेत्रम् संस्था को सूचित किया। नेत्रदान की प्रक्रिया डॉ. ददरवाल द्वारा मोहनलाल राठौड़ के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न कराई गई।
परिजन का किया सम्मान
नेत्रदान जैसी मानवीय पहल के लिए काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन, नेत्रम् संस्था एवं गीता भवन न्यास, बड़नगर द्वारा परिजन को प्रशस्ति-पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। संस्थाओं ने परिवार की उदारता, संवेदनशीलता और समाज के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए इसे जन-जागरूकता का प्रेरक उदाहरण बताया।
इस अवसर पर काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन के सचिव गोविंद काकानी, नेत्रम् संस्था के हेमन्त मूणत, ओमप्रकाश अग्रवाल, सुशील मीनु माथुर सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
उपचार से नेत्रदान तक रही महत्वपूर्ण भूमिका
बता दें कि काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन के वरिष्ठ डॉ. दीनदयाल काकानी एवं उनके सुपुत्र आयुष काकानी द्वारा स्वर्गीय सुषमा खोंड की चिकित्सा की जा रही थी। उनके मार्गदर्शन और संस्थाओं के समन्वित प्रयासों ने इस नेक कार्य को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विशेषज्ञों का मानना है कि एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो लोगों को दृष्टि मिल सकती है। ऐसे में स्वर्गीय सुषमा खोंड के परिवार का यह निर्णय न केवल दो जीवनों में प्रकाश लाने वाला है, बल्कि समाज में अंगदान और नेत्रदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने वाला भी है।
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