धोखाधड़ी मामले में सलमान खान को 7 साल की सजा, न्यायालय ने 2 हजार रुपए अर्थ दंड भी किया
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । रतलाम के सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव ने फर्जी अंकसूची लगाकर नौकरी हथियाने वाले सलमान खान को 7 साल की सजा सुनाई है। अभियुक्त पर दो हजार रुपए का अर्थदंड भी किया गया है। अर्थदंड नहीं चुकाने पर उसे एक माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता समरथ पाटीदार ने बताया कि न्यायालय ने फर्जी अंकसूची लगाकर जिला अस्पताल में लेब असिस्टेंट की नौकरी हथियाने वाले अभियुक्त सलमान पिता अनवर खान (38), निवासी नागझिरी, उज्जैन को सजा सुनाई गई है। तीन धाराओं में 7 वर्ष व एक में 2 वर्ष की सजा हुई है। पाटीदार के अनुसार दिनांक 25.04.2017 को डॉ. प्रभाकर ननावरे ने एक आवेदन थाने स्टेशन रोड रतलाम पर प्रस्तुत किया था। इसमें बताया था कि अनवर खां एनएमए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पिपलौदा का शासकीय सेवा में रहते हुए दिनांक 08.11.2014 को निधन हो गया था। निधन के बाद उनके पुत्र सलमान ने दिनांक 13.02.2015 को अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त करने के लिए आवेदन पत्र प्रस्तुत किया। साथ में शैक्षणिक योग्यता कक्षा 10वीं एवं हायर सेकंण्डरी सर्टिफिकेट परीक्षा (10+2) की साइंस बायलॉजी की अंकसूची सहित अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए थे।
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अंकसूची के सत्यापन में खुली फर्जीवाड़े की पोल
दिनांक 10.06.2016 को अभियुक्त सलमान खान को दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर अस्थायी नियुक्ति जिला चिकित्सालय रतलाम में लेब असिस्टेंट (तृतीय श्रेणी) के पद पर प्रदान की गई थी। दिनांक 13.06.2016 को अभियुक्त सलमान ने जिला चिकित्सालय रतलाम में लेब असिस्टेंट का पद भी ज्वाइन कर लिया। जिला चिकित्सालय रतलाम से पत्र के माध्यम से दिनांक 27.02.2017 को संचालक मध्यप्रदेश राज्य ओपन स्कूल भोपाल से अभियुक्त सलमान की हायर सेकंण्डरी सर्टिफिकेट परीक्षा (10+2) की अंकसूची का सत्यापन करवाने पर भोपाल से जानकारी दी गई कि कार्यालयीन अभिलेखानुसार मिलान करने पर अंकसूची का मिलान नहीं हो पाया है। इससे सिविल सर्जन रतलाम द्वारा दिनांक 12.04.2017 को अवगत कराया गया कि अभियुक्त सलमान की अंकसूची असत्य, फर्जी एवं कूट रचित है।
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97 हजार रुपए से ज्यादा मिला वेतन
शिकायत में बताया गया कि अभियुक्त सलमान खान ने नियुक्ति दिनांक से शासकीय राशि कुल 97,348 रुपए वेतन के रूप में प्राप्त किए। सलमान ने विभाग को गुमराह कर नियुक्ति प्राप्त की है। थाना स्टेशन रोड पर सहायक उप निरीक्षक केसर सिंह यादव को डॉ. प्रभाकर ननावरे का आवेदन प्राप्त होने पर अभियुक्त सलमान पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 420, 467, 468, 409 में एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने आवश्यक अनुसंधान पूर्ण कर अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया था।
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परीक्षा का फॉर्म ही नहीं भरा, अंकसूची में मुहर और नंबर भी फर्जी
प्रकरण में पैरवीकर्ता अपर लोक अभियोजक समरथ पाटीदार ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस द्वारा थाने से अंकसूची का सत्यापन प्राचार्य शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिरमौर जिला रीवा से करवाया गया। वहां से जानकारी प्राप्त हुई की अभियुक्त सलमान ने हायर सेकंडरी का फॉर्म भरा ही नहीं। इतना ही नहीं वर्ष 2007 में मध्य प्रदेश राज्य ओपन की परीक्षा आयोजित होने की जानकारी के साथ-साथ विवादित अंकसूची उनके कार्यालय से जारी होना नहीं पाया गया। अंकसूची में लगाई गई सील भी उनके विद्यालय की नहीं है और अंकसूची पर जो अनुक्रमांक लिखे हैं वे किसी भी विद्यार्थी को जारी नहीं किए गए हैं।





