मेडिकल कॉलेज है या मजाक ? NMC के निरीक्षण में रतलाम का GMC फेल, फैकल्टी, फायर सेफ्टी, स्किल लैब, हॉस्टल, रिसर्च, OPD सहित सब की खुली पोल

NMC ने रतलाम शासकीय मेडिकल कॉलेज को कारण बताओ नोटिस जारी कर फैकल्टी, फायर सेफ्टी, स्किल लैब, हॉस्टल, OPD, बायोमेट्रिक अटेंडेंस और अन्य गंभीर कमियों पर जवाब मांगा है। MBBS सीटों में कटौती और ₹1 करोड़ तक जुर्माने की चेतावनी दी गई है।

मेडिकल कॉलेज है या मजाक ? NMC के निरीक्षण में रतलाम का GMC फेल, फैकल्टी, फायर सेफ्टी, स्किल लैब, हॉस्टल, रिसर्च, OPD सहित सब की खुली पोल
रतलाम का GMC हर पैमाने पर फेल।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य परियोजनाओं में शामिल रतलाम का डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडेय शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय (GMC) एक मजाक बनकर रह गया है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) के निरीक्षण में यह हर मानक पर फेल रहा है। फैकल्टी, फायर सेफ्टी, स्किल लैब, हॉस्टल, रिसर्च, OPD, बायोमैट्रिक अटेंडेंस, क्लानिकल सुविधा सहित हर सुविधा की पोल खुल चुकी है। इसके लिए NMC ने GMC कारण बताओ नोटिस जारी किया है जिसमें MBBS की सीटें घटने तथा 1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाए जाने की चेतावनी दी गई है।

मेडिकल कॉलेज को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) NMC के अंडर ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड (UGMEB) ने जारी किया है। इसमें बताया गया है कि मेडिकल शिक्षा मानक विनियम-2023 (MSMER-2023) के अनुसार सभी मेडिकल कॉलेजों के लिए वार्षिक घोषणा (Annual Declaration) एवं संस्थागत जानकारी NMC पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है। कॉलेज द्वारा पोर्टल पर अपलोड किए गए डेटा का आयोग ने बहुस्तरीय परीक्षण किया था। इसमें वार्षिक घोषणा का सत्यापन, वीडियो रिकॉर्डिंग का परीक्षण, स्टैंडर्ड असेसमेंट फॉर्म (SAF-C) की जांच, आधार अनेबल बायोमैट्रिक अटेंडेंस सिस्टम (AEBAS) के रिकॉर्ड का विश्लेषण, न्यूनतम मानकों के अनुरूप फैकल्टी एवं संसाधनों का मूल्यांकन शामिल था।

मूल्यांकन के बाद आयोग ने पाया कि कॉलेज UG-MSMER 2023 के कई अनिवार्य मानकों का पालन नहीं कर रहा है। इसकी पूरी रिपोर्ट भी नोटिस के साथ भेजी गई है। इस रिपोर्ट से पता चलता है कि निरीक्षण के दौरान कॉलेज में केवल एक-दो नहीं, बल्कि फैकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लीनिकल मैटेरियल, लाइब्रेरी, स्किल लैब, हॉस्टल, सुरक्षा, शोध और अस्पताल संचालन से जुड़े अधिकतर मामलों में गंभीर कमियां पाई गई हैं।

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NMC की सबसे बड़ी आपत्तियां

नोटिस में कहा गया है कि निरीक्षण के दौरान कॉलेज में सत्यापित AEBAS रिकॉर्ड के अनुसार पर्याप्त फैकल्टी उपलब्ध नहीं थे, आवश्यक भौतिक अधोसंरचना में कमी पाई गई और मेडिकल संस्थान की सुविधाएं भी न्यूनतम मानकों से कम मिलीं। क्लीनिकल पैरामीटर निर्धारित स्तर से नीचे पाए गए और वार्षिक घोषणा में दर्शाई गई स्थिति और वास्तविक उपलब्धता में भी बड़ा अंतर है। इन्हीं आधारों पर कॉलेज से पूछा गया है कि उसके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए?

तीन दिन का अल्टीमेटम

NMC ने कॉलेज को निर्देश दिया है कि नोटिस जारी होने की तारीख से तीन कार्य दिवस के भीतर बिंदुवार, दस्तावेजों सहित जवाब प्रस्तुत करें। जवाब में यह बताना होगा कि क्यों न MBBS सीटें घटाई जाएं? मेडिकल शिक्षा नियमों के तहत आर्थिक दंड (1 करोड़ रुपए) क्यों नहीं लगाया जाए?

आयोग ने यह भी कहा है कि यदि निर्धारित समय में जवाब नहीं मिला तो यह मान लिया जाएगा कि कॉलेज के पास कोई वैध स्पष्टीकरण नहीं है। ऐसे में उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर एकतरफा निर्णय लिया जा सकेगा।

साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि कोई जानकारी गलत, मनगढ़ंत अथवा भ्रामक पाई गई तो इसे गंभीर उल्लंघन मानते हुए अलग से कार्रवाई होगी।

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कॉलेज प्रशासन में मचा हड़कंप

NMC का नोटिस से कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मच गया। मेडिकल कॉलेज की मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं अधिष्ठाता डॉ. अनीता मूथा ने तत्काल आंतरिक आदेश जारी किया। इसमें उन्होंने अस्पताल अधीक्षक, स्थापना शाखा, लाइब्रेरी, स्किल लैब, AEBAS, MRD, नर्सिंग, फायर सेफ्टी सहित संबंधित सभी विभागों के प्रभारी अधिकारियों को अपने-अपने विभाग से संबंधित सभी बिंदुओं का स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए ताकि समय सीमा के भीतर NMC को जवाब भेजा जा सके।

सबसे गंभीर संकट: फैकल्टी की भारी कमी

NMC की रिपोर्ट के अनुसार मेडिकल कॉलेज के लगभग सभी प्रमुख विभागों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर/डिमॉन्स्ट्रेटर की संख्या निर्धारित मानकों से काफी कम है।

इनमें एनाटॉमी, एनीस्थीसियोलॉजी, बायोकेमेस्ट्री, कम्प्युनिटी मेडिसिन, डेंटिस्ट्री, डर्मेटोलॉजी, फॉरेंसिक मेडिसिन, जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, माइक्रोबायोलॉजी, ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, ऑप्थेल्मोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, ईएनटी, पैथॉलोजी, पीडियाट्रिक्स, फॉर्मेकोलॉजी, फिजियोलॉजी, फिजियाट्री, रेडियोडायग्नोसिस विभाग शामिल हैं।

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सरकारी दावों पर खड़े हुए सवाल

रतलाम मेडिकल कॉलेज प्रदेश सरकार की उन परियोजनाओं में शामिल है जिन पर सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इसका उद्देश्य मालवा-निमाड़ क्षेत्र को बेहतर चिकित्सा शिक्षा और उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना था।

लेकिन NMC की रिपोर्ट यदि सही पाई जाती है, तो यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि करोड़ों रुपए की सार्वजनिक निवेश वाली संस्था में अब भी फैकल्टी, सुरक्षा प्रमाणन, स्किल लैब, रिसर्च सुविधाएं, हॉस्टल, क्लीनिकल लोड और बुनियादी संसाधनों जैसी कमियां क्यों बनी हुई हैं? यह केवल कॉलेज प्रशासन का ही नहीं, बल्कि मेडिकल शिक्षा विभाग की निगरानी और संसाधन प्रबंधन की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करता है।

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छात्रों और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर

यदि NMC संतुष्ट नहीं होता और MBBS सीटों में कटौती करता है, तो इसका असर केवल नए मेडिकल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे क्षेत्र में भविष्य के डॉक्टरों की उपलब्धता, मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता और लंबे समय में स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं पर भी प्रभाव पड़ सकता है। मामले में कॉलेज प्रशासन की ओर से NMC के नोटिस पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।

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