MP पुलिस में बड़ा फेरबदल : नक्सल मोर्चे से निरीक्षकों की वापसी, नए अधिकारियों को भेजा, PHQ ने जारी की 36 अधिकारियों की तबादला सूची
मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने निरीक्षकों के तबादले किए हैं। नक्सल प्रभावित बालाघाट और मण्डला से 2 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाले अधिकारियों की वापसी हुई है, वहीं नई टीम को मोर्चे पर भेजा गया है।
एसीएन टाइम्स @ भोपाल । मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए निरीक्षकों और कार्यवाहक निरीक्षकों के तबादला आदेश जारी किए हैं। शुक्रवार को सहायक पुलिस महानिरीक्षक (कार्मिक) अमित सक्सेना के हस्ताक्षर से जारी इस सूची में कुल 36 पुलिस अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इस स्थानांतरण प्रक्रिया की सबसे खास बात यह है कि इसमें मुख्य रूप से प्रदेश के नक्सल प्रभावित जिलों बालाघाट और मण्डला में तैनात अधिकारियों को बदला गया है।
पुलिस स्थापना बोर्ड के अनुमोदन के पश्चात जारी इस आदेश को दो मुख्य भागों में बांटा गया है। पहले हिस्से में उन 18 निरीक्षकों के नाम हैं, जिन्होंने नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों (बालाघाट और मण्डला) में अपनी 02 वर्ष की कठिन सेवा अवधि पूर्ण कर ली है। अब इन अधिकारियों को मुख्यधारा के अन्य जिलों में पदस्थ किया गया है। उदाहरण के तौर पर, निरीक्षक सुनील उईके को बालाघाट से छिंदवाड़ा, अंतिम पवार को मण्डला से खरगौन और नरेंद्र सिंह यादव को बालाघाट से जिला भोपाल (ग्रामीण) भेजा गया है। वहीं, कार्यवाहक निरीक्षक महेंद्र सिंह राठौर को बालाघाट से भोपाल (नगरीय) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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नक्सल प्रभावित इलाकों में नई ऊर्जा बढ़ा उद्देश्य
सूची के दूसरे भाग में उन 18 निरीक्षकों/कार्यवाहक निरीक्षकों के नाम शामिल हैं, जिन्हें आगामी 02 वर्ष की अवधि के लिए नक्सल मोर्चे (बालाघाट और मण्डला) पर तैनात किया गया है। रतलाम जिले में पदस्थ निरीक्षक सत्येन्द्र रघुवंशी को अब जिला मण्डला भेजा गया है। इसी तरह जीआरपी भोपाल से प्रकाशचंद सेन को मण्डला और उज्जैन से रोहित पटेल व गगन बादल को बालाघाट भेजा गया है। इस फेरबदल का उद्देश्य नक्सल प्रभावित इलाकों में नई ऊर्जा और नए दृष्टिकोण के साथ सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करना है।
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पुलिसिंग को मजबूत करने की दिशा में कदम
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि स्थानांतरित किए गए सभी अधिकारियों को समय-सीमा के भीतर कार्यमुक्त किया जाए। हालांकि, यदि कोई अधिकारी वर्तमान में निलंबन के अधीन है, तो उसे कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा और इसकी सूचना तत्काल पुलिस मुख्यालय को दी जाएगी। जिलों के अंदर कार्य आवंटन संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) द्वारा किया जाएगा। 2027 के चुनावी वर्ष से पहले इसे पुलिसिंग को मजबूत करने की दिशा में एक रूटीन लेकिन महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना जा रहा है।
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देखें स्थानांतरित निरीक्षकों की सूची











