दरिंदगी की हद ! ट्रक में बैठाने के बाद कर दी महिला की हत्या, लाश फोरलेन के नीचे फेंकी, CDR व CCTV ने खोला राज तो हो गई उम्र कैद
रतलाम के 5 साल पुराने मर्डर केस में बड़ा फैसला—महिला की हत्या कर शव फोरलेन के नीचे फेंकने वाले आरोपी को उम्रकैद। सीसीटीवी और CDR बने सबसे बड़े सबूत।
5 साल पुराने केस में कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला, साबित नहीं होने से ज्यादती के आरोप में किया बरी
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । पांच साल पुराने एक सनसनीखेज हत्याकांड में न्यायालय ने अहम् फैसला सुनाया है। महिला की हत्याकर शव फोरलेन के नीचे फेंकने के मामले में एक ट्रक चालक को उम्रकैद की सजा सुनाई है। मामले में काल डिटेल के रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, मजबूत तकनीकी साक्ष्य और गवाह सजा का आधार बनें हैं। हालांकि, पुलिस ज्यादती का आरोप साबित नहीं कर सकी।
अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता सतीश त्रिपाठी के अनुसार घटना 18 जून 2021 की रात की है। आरोपी सुरेश पिता बंसीलाल जाटव (47) निवासी बड़ी मोहल्ला राव इंदौर अपने आयशर ट्रक से सामान लेकर इंदौर से रतलाम के लिए रवाना हुआ था। उसने श्रमिक कॉलोनी शमशान घाट के पास राऊ निवासी एक महिला को भी अपने ट्रक में बैठा लिया था। सुरेश ने महिला की हत्याकर कर दी थी।
इसके बाद उसने रतलाम के बिलपांक टोल नाके को पार किया और वापस इंदौर की तरफ वाहन मोड़ लिया। उसने प्रकाश नगर पुलिया के नीचे अंधेरे में महिला का शव फेंक दिया था। सुबह ग्रामीणों ने बिलपांक पुलिस थाने पर एक अज्ञात महिला का शव मिलने की सूचना दी थीl मामले में पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की थी।
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सीसीटीवी में नजर नजर आए थे दोनों
पुलिस ने महिला के अज्ञात होने के कारण पुलिस ने आसपास के थाना क्षेत्र को सूचना दी थी l चोकला एवं चिकलिया टोल नाके के फुटेज भी प्राप्त किए। आरोपी के मोबाइल की सीडीआर भी निकाली। सीसीटीवी फुटेज में आरोपी एवं महिला दोनों दिखाई दिए थे। सीडीआर से घटनास्थल तथा आरोपी की गाड़ी खराब होने के स्थान और महिला का आरोपी के साथ होने की पुष्टि भी हुई। यह भी स्पष्ट हुआ कि जहां महिला का शव मिला था वहां आरोपी उपस्थित था। आरोपी शव को ठिकाने लगाने के बाद दूसरे दिन रतलाम में सामान देने पहुंचा था।
ज्यादती की बात भी आई थी सामने
विवेचना के दौरान आरोपी द्वारा महिला के साथ ज्यादती होने की बात भी सामने आई। इसके चलते बिलपांक पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर भारतीय दंड संहिता की धारा 201, 302, 376 के अंतर्गत न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। अभियोजन द्वारा न्यायालय में सीसीटीवी फुटेज, सीडीआर के अलावा 77 दस्तावेज प्रस्तुत किए गए और 20 गवाहों के कथन भी करवाए। प्रस्तुत प्रमाणों के आधार पर तृतीय सत्र न्यायाधीश ने आरोपी को धारा 302, 201 भादंवि का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। ज्यादती का आरोप सिद्ध नहीं होने से इस मामले में दोषमुक्त कर दिया। शासन की ओर से पैरवी अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता सतीश त्रिपाठी ने की।
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658 कार्य दिवस में 371 प्रकरण का कराया निराकरण, 18 को मिली उम्र कैद
अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता त्रिपाठी की नियुक्ति मार्च 2023 में हुई थी। 31 मार्च 2026 तक कुल 658 न्यायालय कार्य दिवस 371 सत्र प्रकरणों का निराकरण करवाया। इस दौरान उन्होंने उन्होंने न्यायालय के समक्ष 2366 गवाहों के कथन करवाए। निराकृत प्रकरणों में 18 अभियुक्तों को को आजीवन कारावास वहीं 52 अभियुक्त 10 - 10 वर्ष तक की सजा से दंडित किए गए। बता दें कि, शासकीय अधिवक्ताओं को उनके द्वारा न्यायालय में की जा रही पैरवी की जानकारी प्रतिमाह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को देना आवश्यक है।








