स्वैच्छिक रक्तदान ने बढ़ाया रतलाम का नाम, सात-आठ जिलों के मरीजों को मिल रहा जांचा हुआ रक्त : गोविंद काकानी

रतलाम में स्वैच्छिक रक्तदान की मजबूत व्यवस्था से सात-आठ जिलों के मरीजों को जांचा हुआ रक्त उपलब्ध हो रहा है। गोविंद काकानी ने 105 बार रक्तदान के अनुभव के साथ भ्रांतियां दूर कर नियमित रक्तदान की अपील की।

स्वैच्छिक रक्तदान ने बढ़ाया रतलाम का नाम, सात-आठ जिलों के मरीजों को मिल रहा जांचा हुआ रक्त : गोविंद काकानी
स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर विशेष।

राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर रक्तदान की जरूरत और भ्रांतियों को दूर करने का बड़ा संदेश; मानव सेवा समिति के हजारों रक्तदाताओं का महत्वपूर्ण योगदान

एसीएन टाइम्स @ रतलाम। राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान अभियान की सफलता का प्रभाव रतलाम में भी दिखाई देता है। रतलाम में उपलब्ध रक्त व्यवस्था के कारण आसपास के सात-आठ जिलों के मरीज भी रक्त चढ़ाने के लिए यहां आना पसंद करते हैं, क्योंकि उन्हें आवश्यक जांच के बाद रक्त उपलब्ध हो जाता है। इस व्यवस्था को मजबूत बनाने में मानव सेवा समिति और उसके साथ जुड़े हजारों स्वैच्छिक रक्तदाताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

किसी जरूरतमंद के लिए रक्त की एक यूनिट जीवन की उम्मीद बन सकती है। दुर्घटना में घायल व्यक्ति हो, प्रसव के दौरान रक्त की आवश्यकता वाली महिला, गंभीर बीमारी से जूझ रहा मरीज या नियमित रक्त चढ़ाने वाले थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे, समय पर रक्त उपलब्ध होना कई जिंदगियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसी आवश्यकता और स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 1 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस मनाया जाता है।

रक्त का आज तक नहीं बना कृत्रिम विकल्प

रक्त मानव शरीर का ऐसा महत्वपूर्ण घटक है, जिसका आज तक कोई पूर्ण कृत्रिम विकल्प उपलब्ध नहीं हो पाया है। अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में विभिन्न परिस्थितियों में रक्त की आवश्यकता लगातार बनी रहती है। ऐसे में स्वस्थ और पात्र लोगों द्वारा किया जाने वाला स्वैच्छिक रक्तदान रक्त की उपलब्धता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

ये भी पढ़ें


आपात स्थिति में रक्त की उपलब्धता सबसे जरूरी

दुर्घटना या किसी अन्य आपात स्थिति में मरीज के परिजन अक्सर रक्त की व्यवस्था के लिए परेशान होते हैं। ऐसी परिस्थितियों में यदि समाज में नियमित स्वैच्छिक रक्तदाताओं की संख्या पर्याप्त हो तो जरूरतमंद मरीज को समय पर रक्त उपलब्ध कराया जा सकता है। रक्तदान केवल किसी परिचित या रिश्तेदार के लिए ही नहीं, बल्कि किसी अनजान व्यक्ति का जीवन बचाने के लिए भी किया जा सकता है। यही भावना स्वैच्छिक रक्तदान को सामाजिक सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम बनाती है।

थैलेसीमिया मरीजों के लिए रक्तदान जीवन का सहारा

थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों और मरीजों को लंबे समय तक नियमित रूप से रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। ऐसे मरीजों के लिए स्वैच्छिक रक्तदाताओं का सहयोग जीवनरक्षक साबित होता है। इसलिए रक्तदान को केवल किसी विशेष दिवस तक सीमित रखने के बजाय इसे नियमित सामाजिक सेवा के रूप में अपनाने की आवश्यकता है।

105 बार रक्तदान के बाद भी नहीं आई कमजोरी

मानव सेवा समिति से जुड़े गोविंद काकानी ने कहा कि रक्तदान को लेकर समाज में आज भी कई भ्रांतियां हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें 105 बार रक्तदान करने का सौभाग्य मिला है, लेकिन रक्तदान के कारण उन्हें किसी तरह की कमजोरी महसूस नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जो लोग कमजोरी आने या स्वास्थ्य प्रभावित होने की आशंका के कारण रक्तदान नहीं करते, उन्हें इन भ्रांतियों से बाहर निकलने की जरूरत है। स्वस्थ और पात्र व्यक्ति का रक्तदान निर्धारित चिकित्सकीय जांच और स्वास्थ्य मानकों के अनुसार ही कराया जाता है। इसलिए रक्तदान से पहले चिकित्सकीय सलाह और पात्रता संबंधी निर्देशों का पालन करना आवश्यक है।

ये भी पढ़ें

युवा बनें स्वैच्छिक रक्तदान के वाहक

राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर युवाओं से केवल स्वयं रक्तदान करने ही नहीं, बल्कि अपने मित्रों, परिवार और समाज के अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की गई है। जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ या किसी अन्य विशेष अवसर को रक्तदान से जोड़कर इस सेवा को जीवन का हिस्सा बनाया जा सकता है। रक्तदान किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। स्वस्थ और पात्र व्यक्ति का स्वैच्छिक रक्तदान किसी परिवार की सबसे बड़ी चिंता को दूर कर सकता है और किसी जरूरतमंद के जीवन में नई उम्मीद ला सकता है। राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर संकल्प लिया जाए कि रक्तदान को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करेंगे, दूसरों को रक्तदान के लिए प्रेरित करेंगे और जरूरतमंदों के जीवन में उम्मीद की एक बूंद जरूर पहुंचाएंगे।

"रक्तदान करें - जीवन बचाने की मुहिम से जुड़ें।"

ये भी पढ़ें