रतलाम तिहरा हत्याकांड ! तीन हत्यारों को तिहरा आजीवन कारावास, मुख्य आरोपी की ऐनकाउंटर में हुई थी मौत, 2020 की छोटी दीपावली पर हुई थी परिवार की हत्या
रतलाम के चर्चित राजीव नगर ट्रिपल मर्डर केस में न्यायालय ने तीन आरोपियों को तिहरा आजीवन कारावास सुनाया। डीएनए, बैलेस्टिक रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज बने सजा का आधार।
न्यायालय ने डीएनए, बैलेस्टिक रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर सुनाई सजा
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । वर्ष 2020 की छोटी दीपावली की रात शहर के राजीव नगर क्षेत्र में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज वारदात के मामले में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव ने मामले में दोषी पाए गए तीन आरोपियों को तिहरे आजीवन कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया है। मुख्य आरोपी की मौत पुलिस एनकाउंटर में पहले हो गई थी।
प्रकरण में पैरवीकर्ता अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता समरथ पाटीदार ने बताया कि 25 नवंबर 2020 (छोटी दीपावली) की रात थाना औद्योगिक क्षेत्र अंतर्गत राजीव नगर में सैलून संचालक गोविंद सोलंकी (50), उनकी पत्नी शारदा सोलंकी (45) एवं पुत्री दिव्या सोलंकी (21) की अज्ञात बदमाशों द्वारा गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई थी। घटना का खुलासा अगले दिन सुबह करीब 8 बजे हुआ, जब मकान में नीचे किराए से रहने वाली नर्स ज्वेलिका को अपनी एक्टिवा स्कूटी घर के बाहर दिखाई नहीं दी थी। स्कूटी के संबंध में पूछताछ करने वह मकान मालिक के कमरे तक पहुंची, जहां का दृश्य देखकर वह घबरा गई थी। उसने तत्काल आसपास के लोगों को सूचना दी।
सूचना मिलने पर थाना औद्योगिक क्षेत्र पुलिस मौके पर पहुंची थी। कमरे के भीतर गोविंद सोलंकी, शारदा सोलंकी और दिव्या सोलंकी मृत अवस्था में पड़े मिले थे। तीनों के सिर में गोली लगी हुई थी और खून फैला हुआ था। फरियादी ज्वेलिका की रिपोर्ट पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 सहित आयुध अधिनियम की धारा 25/27 के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की।
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सीसीटीवी फुटेज से खुली गुत्थी
मामले की जांच तत्कालीन थाना प्रभारी रेवलसिंह बर्डे के नेतृत्व में गठित टीम ने की। जांच के दौरान घटनास्थल तक आने-जाने वाले मार्गों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले गए। फुटेज में घटना के बाद आरोपी फरियादी ज्वेलिका की सफेद स्कूटी लेकर भागते हुए दिखाई दिए।
जांच में यह भी सामने आया कि वारदात से पहले आरोपी गुंजन प्रजापति के इंद्रानगर स्थित नूरी गेस्ट हाउस जाते हुए सीसीटीवी कैमरों में दिखाई दिए थे। गेस्ट हाउस संचालक गुंजन प्रजापति ने उनकी पहचान दिलीप देवल तथा अनुराग उर्फ बॉबी के रूप में की।
पुलिस ने अनुराग को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो उसने अपने साथियों दिलीप देवल, लाला भाबोर और गोलू उर्फ गौरव बिलवाल के साथ मिलकर हत्या करना स्वीकार किया। इसके बाद गोलू और लाला भाबोर को भी गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के आधार पर घटना में प्रयुक्त वाहन, कपड़े, जेवरात और अन्य सामग्री जब्त की गई।
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गिरफ्तारी के दौरान पुलिस पर फायरिंग, दिलीप देवल की हुई मौत
मुख्य आरोपी दिलीप देवल ने गिरफ्तारी के दौरान पुलिस दल पर देशी पिस्टल से फायरिंग कर दी थी। जवाबी कार्रवाई में दिलीप देवल की मौत हो गई थी। पुलिस ने उसके कब्जे से हथियार भी बरामद किया था। इसके बाद पुलिस ने मिडटाउन क्षेत्र स्थित उसके किराए के मकान की तलाशी ली, जहां से एक देशी पिस्टल, जिंदा राउंड, जेवरात तथा अन्य सामग्री जब्त की गई। अपराध में लूटे गए गहनों की पहचान मृतक की पुत्री मोना ने की। जांच पूरी होने के बाद आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया।
वैज्ञानिक साक्ष्य बने सजा का आधार
शासकीय अधिवक्ता समरथ पाटीदार के अनुसार पुलिस ने इस मामले को अपने समय के सबसे जघन्य एवं सनसनीखेज अपराधों में शामिल करते हुए विशेष श्रेणी में चिह्नित किया था। न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि के लिए परिस्थितिजन्य साक्ष्य, डीएनए रिपोर्ट, बैलेस्टिक रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज तथा आरोपियों की निशानदेही पर बरामद सामग्री को महत्वपूर्ण आधार माना गया।
साक्ष्य जो बने सजा का आधार
1. डीएनए जांच रिपोर्ट : आरोपियों से जब्त लोवर, पैंट, चप्पल और रुमाल पर मृतक गोविंद, शारदा एवं दिव्या का डीएनए पाया गया।
2. स्कूटी पर डीएनए साक्ष्य : फरियादी ज्वेलिका की स्कूटी, जिसका उपयोग घटना में किया गया था, उसके हैंडल पर आरोपी लाला भाबोर का डीएनए मिला।
3. बैलेस्टिक जांच रिपोर्ट : दिलीप देवल के घर से बरामद देशी पिस्टल से ही घटनास्थल पर मिले तीन खाली कारतूस और मृतकों के शरीर से निकली गोलियां चलाई गई थीं।
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33 गवाह, 210 दस्तावेज और 111 भौतिक वस्तुएं की प्रस्तुत
अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष 111 भौतिक वस्तुएं, 210 दस्तावेज तथा 33 गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। वैज्ञानिक एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की सुदृढ़ श्रृंखला के आधार पर न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए तिहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। मामले के तीनों दोषसिद्ध आरोपी 2 दिसंबर 2020 से जेल में बंद हैं।
पूछताछ में सामने आया एक और हत्याकांड
जांच के दौरान आरोपी अनुराग ने पुलिस पूछताछ में बताया था कि दिलीप देवल ने हिम्मतसिंह देवल और सुमितसिंह चौहान के साथ मिलकर इस घटना से पूर्व 18 मई 2020 को कस्तूरबा नगर रतलाम में प्रेमकुंवर सिसौदिया की हत्या भी लूट के उद्देश्य से की थी।
जांच में यह भी सामने आया कि दिलीप देवल दाहोद में हत्या के एक मामले में जेल में बंद था। जमानत पर छूटने के बाद वह रतलाम में फरारी काट रहा था और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रह रहा था। पुलिस जांच के अनुसार वह रुपए और सोने-चांदी के जेवरात लूटने के लिए हत्याएं करता था।
पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि छोटी दीपावली के दौरान पटाखों की आवाज के कारण गोलियों की आवाज सुनाई नहीं देगी, इसलिए दिलीप देवल ने वारदात के लिए उसी दिन का चयन किया था।
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दोषसिद्ध आरोपी
1. अनुराग उर्फ बॉबी पिता प्रवीण सिंह परमार, (33), निवासी – सेक्टर-बी, विनोबा नगर, रतलाम।
2. गोलू उर्फ गौरव पिता राजेश बिलवाल (29), निवासी – रेलवे कॉलोनी, रतलाम।
3. लाला पिता मनु उर्फ भरत उर्फ भारता भाबोर (27), निवासी – अभलोड, लिम्बू फलिया, थाना जेसावाड़ा, जिला दाहोद (गुजरात)।
4. दिलीप पिता भावसिंह देवल पटेलिया (35), निवासी – डूंगरी फलिया, ग्राम खरेड़ी, थाना दाहोद ग्रामीण, जिला दाहोद (गुजरात)।
साइको किलर था दिलीप, वीडियो देख कर सीखता था क्राइम
बता दें कि, दिलीप साइको किलर था। लूट और हत्या से जुड़े वीडियो देखकर वारदात का तरीका सीखता था। वह अपनी गैंग के साथ लूटपाट करता था और लूट के शिकार लोग उसकी पहचान उजागर न कर दें इसलिए उनकी हत्या कर देता था। इसके निशाने पर ऐसी अकेली महिलाएं या छोटा परिवार होता था जहां कोई संघर्ष न करना पड़े और कोई गवाह भी नहीं बचे। दिलीप पर हत्या के 6 मामले दर्ज थे और उसकी गैंग के सभी सदस्य नशे के आदी थे।
मुख्यमंत्री ने भी की थी टिप्पणी
दिलीप देवल के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि ‘ऐसे नरपिशाच को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है।‘









